ईरान-अमेरिका टकरावः अब बड़े बमों का इस्तेमाल होगा… रक्षा सचिव का संकेत, ट्रंप का भी सख्त रुख

डिजिटल डेस्क- मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब और खतरनाक मोड़ लेता नजर आ रहा है। पिछले एक महीने से चल रहे अमेरिका-ईरान टकराव में फिलहाल सीजफायर की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। इसी बीच पीट हेगसेथ ने बड़ा बयान देते हुए संकेत दिया है कि अब इस जंग में और अधिक ताकतवर हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकता है। रक्षा सचिव ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दौरान सैनिकों से मुलाकात के अनुभव साझा करते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर तैनात जवान पूरी तरह तैयार हैं और जीत हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने बताया कि एक युवा सैनिक ने उनसे साफ तौर पर कहा “हमें और ज्यादा और बड़े बम चाहिए।” इस पर हेगसेथ ने संकेत दिया कि सेना की इस मांग को पूरा किया जाएगा। उनके इस बयान से साफ है कि अमेरिका अब सैन्य कार्रवाई को और तेज और आक्रामक बनाने की तैयारी में है।

हर ऑपरेशन को मजबूती से अंजाम दिया गया-हेगसेथ

हेगसेथ ने यह भी बताया कि जंग के दौरान अमेरिकी सैनिकों ने दुश्मन की मिसाइलों को सफलतापूर्वक मार गिराया है और हर स्तर पर ऑपरेशन को मजबूती से अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सैनिकों में मिशन को जल्द खत्म करने और निर्णायक जीत हासिल करने का जबरदस्त जज्बा है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सख्त रुख अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने साफ कहा कि अब अमेरिका हर देश की मदद के लिए आगे नहीं आएगा। उन्होंने इशारों-इशारों में सहयोगी देशों को आत्मनिर्भर बनने की सलाह दी।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी कही बात

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप ने कहा कि जो देश वहां से तेल नहीं ले पा रहे हैं, वे अमेरिका से खरीद सकते हैं क्योंकि अमेरिका के पास पर्याप्त संसाधन हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अन्य देश चाहें तो खुद आगे बढ़कर जोखिम उठाएं और अपने संसाधनों की सुरक्षा करें। अमेरिका अब हर स्थिति में उनकी मदद के लिए नहीं आएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां तनाव बढ़ने से पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है।

अमेरिका लगातार बना रहा है निशाना

गौरतलब है कि ईरान लगातार क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल से जुड़े ठिकानों को निशाना बना रहा है, जिससे हालात और ज्यादा विस्फोटक होते जा रहे हैं। दूसरी ओर, अमेरिका की ओर से बड़े और आधुनिक हथियारों के इस्तेमाल के संकेत ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इस बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी बढ़ती जा रही है। हालांकि अब तक किसी ठोस शांति वार्ता या सीजफायर की दिशा में प्रगति नहीं हुई है।

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