गाजियाबाद में अवैध निर्माण पर सख्ती, बिना नक्शा पास घरों को नहीं मिलेगा बिजली-पानी कनेक्शन

डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में अवैध और अनाधिकृत निर्माणों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना स्वीकृत मानचित्र (लेआउट मैप) के बने भवनों को अब बिजली, पानी और सीवर जैसे बुनियादी कनेक्शन नहीं दिए जाएंगे। इस फैसले से अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोगों और बिल्डरों के बीच हड़कंप मच गया है। जीडीए ने इस संबंध में नगर निगम के जलकल विभाग और विद्युत निगम को औपचारिक पत्र जारी कर सख्त निर्देश दिए हैं कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि यदि कोई विभाग नियमों की अनदेखी करते हुए अवैध निर्माणों को कनेक्शन देता है, तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

वर्तमान में विकसित हो रही अवैध कॉलोनियों का किया जिक्र

जीडीए के विशेष कार्याधिकारी राजीव रत्न सिंह ने जलकल महाप्रबंधक और बिजली विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखकर साफ कहा है कि अवैध निर्माणों को किसी भी तरह का प्रोत्साहन न दिया जाए। पत्र में विशेष रूप से कल्लू गढ़ी डासना और रेलवे लाइन के आसपास तेजी से विकसित हो रही अवैध कॉलोनियों का जिक्र किया गया है, जहां बिना विभागीय अनुमति के ही बिजली और पानी के कनेक्शन दिए जा रहे हैं। प्राधिकरण ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन अवैध निर्माणों को पहले ही कनेक्शन मिल चुके हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से काटा जाए। साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी सरकारी संपत्ति को नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी उन विभागों की होगी जिन्होंने नियमों के विरुद्ध जाकर कनेक्शन जारी किए हैं।

अवैध निर्माण रोकने के लिए उठाया गया कदम

इस कार्रवाई के पीछे सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले का हवाला दिया गया है। ‘राजेंद्र कुमार बरजात्या बनाम उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद’ मामले में कोर्ट ने साफ निर्देश दिए थे कि बिजली, पानी और सीवर कनेक्शन केवल उन्हीं भवनों को दिए जाएं, जिनके पास कंपलीशन सर्टिफिकेट या ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट हो। कोर्ट ने यह भी कहा था कि अवैध निर्माण रोकने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जीडीए ने अवैध कॉलोनियों और बिना नक्शा पास कराए किए जा रहे निर्माणों की पहचान कर ली है। इन इलाकों में जल्द ही सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसके अलावा ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है, ताकि बिल्डरों और संबंधित लोगों पर कानूनी शिकंजा कसा जा सके।

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