डिजिटल डेस्क- नेपाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाला मोड़ तब देखने को मिला, जब रैपर से राजनेता बने बालेन शाह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 35 वर्षीय बालेन शाह का यह सफर न केवल असामान्य है, बल्कि यह देश की पारंपरिक राजनीति के खिलाफ जनता के बदलते मूड का भी संकेत देता है। पिछले साल युवाओं के नेतृत्व में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद नेपाल में आम चुनाव हुए थे, जिनमें बालेन शाह ने जबरदस्त जीत हासिल की। उनके चुनाव प्रचार का मुख्य मुद्दा था भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सत्ता के पुराने ढर्रे को खत्म करना। यही कारण रहा कि बड़ी संख्या में युवा और आम मतदाता उनके साथ खड़े हो गए।
काठमांडू में तीन साल तक रहे हैं मेयर
बालेन शाह इससे पहले काठमांडू के मेयर रह चुके हैं, जहां उन्होंने करीब तीन साल तक काम किया। मेयर के तौर पर उनकी छवि एक सख्त और काम करने वाले नेता की बनी। इसी लोकप्रियता के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में कदम रखा और ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ के साथ मिलकर प्रधानमंत्री पद की दौड़ में उतर गए। चुनाव में मिली भारी जीत ने उन्हें सीधे देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचा दिया। शपथ ग्रहण से ठीक पहले बालेन शाह ने एक गाना भी रिलीज़ किया, जो नेपाल के भविष्य और बदलाव की उम्मीदों पर आधारित था। यह गाना कुछ ही घंटों में लाखों लोगों तक पहुंच गया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इससे पहले भी बालेन शाह ‘अंडरग्राउंड रैप’ की दुनिया में सक्रिय रहे हैं और अपने गानों के जरिए सामाजिक मुद्दों, खासकर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं।
नेपाल के शासन में करना पड़ेगा कठिन चुनौतियों का सामना
उनके समर्थक बालेन शाह को एक ऐसे नेता के रूप में देख रहे हैं, जो नेपाल को पुराने राजनीतिक ढांचे से बाहर निकालकर एक नई दिशा दे सकते हैं। उनके लिए बालेन सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि बदलाव का प्रतीक बन चुके हैं। हालांकि, इस जीत के साथ चुनौतियां भी कम नहीं हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों और आम नागरिकों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या महज चार साल पुरानी पार्टी ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ अपने बड़े-बड़े वादों को पूरा कर पाएगी। देश की जटिल राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों में अनुभव की कमी एक बड़ा मुद्दा बन सकती है।