डिजिटल डेस्क- बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। जांच में पता चला है कि एक संगठित गिरोह ने अभ्यर्थियों को दिव्यांग दिखाकर उनके नाम पर फर्जी तरीके से दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाए और फिर उनकी जगह सॉल्वर बैठाकर परीक्षा पास कराई। इस पूरे नेटवर्क में झांसी और ललितपुर के सीएमओ कार्यालयों से जुड़े कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य अभ्यर्थियों को 40 फीसदी दिव्यांगता का प्रमाण पत्र दिलवाने के लिए झांसी सिविल अस्पताल और ललितपुर सीएमओ दफ्तर के संपर्क में रहते थे। आरोप है कि झांसी सिविल अस्पताल का एक कर्मचारी इस पूरे रैकेट में अहम भूमिका निभा रहा था, जो फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में मदद करता था। इस नेटवर्क में मोंटी यादव उर्फ शिवा यादव का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है, जिसे प्रति प्रमाण पत्र करीब 40 हजार रुपये दिए जाते थे।
गिरोह का सरगना बीसीए
गिरोह का सरगना बीसीए पास मनीष मिश्रा बताया जा रहा है, जिसने अपने साथियों आकाश अग्रवाल और सौरभ सोनी के साथ मिलकर इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। एसटीएफ ने अब तक कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें तीन अभ्यर्थी राजकिशोर, राम मिलन और अभिषेक यादव के साथ-साथ तीन सॉल्वर नीरज झा, सत्यम कुमार और दीपक कुमार शामिल हैं। जांच एजेंसियां अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी गहनता से जांच कर रही हैं, और जल्द ही और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि अभ्यर्थियों के दिव्यांग प्रमाण पत्र 19 अगस्त 2023 को ललितपुर और झांसी सीएमओ कार्यालय से जारी किए गए थे। उदाहरण के तौर पर राजकिशोर का 40 फीसदी लो विजन दिव्यांगता प्रमाण पत्र ललितपुर से जारी हुआ था, जबकि राम मिलन ने झांसी से 40 फीसदी शारीरिक अक्षमता का प्रमाण पत्र बनवाया था। इन प्रमाण पत्रों का उपयोग करके इन अभ्यर्थियों ने परीक्षा में शामिल होकर सॉल्वर की मदद से सफलता हासिल की।
सात-आठ वर्षों से सक्रिय है गिरोह
एसटीएफ की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि यह गिरोह पिछले सात-आठ वर्षों से सक्रिय है और अब तक सैकड़ों लोगों को इसी तरह से चयन दिलाने का दावा किया जा रहा है। कई ऐसे नाम भी सामने आए हैं जिन्होंने अलग-अलग परीक्षाओं में सॉल्वर के माध्यम से सफलता पाई है। इनमें बैंकिंग सेक्टर के कई चयनित उम्मीदवार शामिल हैं, जिनकी नौकरी अब खतरे में पड़ सकती है। गिरफ्तार आरोपियों में कुछ सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं, जो वर्तमान में पीडब्ल्यूडी और अन्य विभागों में कार्यरत हैं। इनमें नीरज झा, जो दिल्ली पीडब्ल्यूडी में मल्टी टास्किंग स्टाफ के रूप में काम कर रहा था, और आकाश अग्रवाल, जो झांसी पीडब्ल्यूडी में क्लर्क के पद पर तैनात था, के नाम प्रमुख हैं। एसटीएफ इन सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को रिपोर्ट भेजेगी।