उत्तराखंड डेस्क रिपोट – देवो की भूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड में हर वर्ष चलने वाली उत्तराखंड की विश्वविख्यात चारधाम यात्रा का आगाज़ एक बार फिर होने जा रहा है, आपको बता दे कि इस वर्ष चारधाम यात्रा का आधिकारिक आगाज़ 19 अप्रैल 2026 को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ होगा वहीं केदारनाथ के कपाट 22 अप्रैल और बद्रीनाथ के 23 अप्रैल को खुलेंगे. इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 6 मार्च 2026 से शुरू भी हो चुके हैं. राज्य सरकार व मंदिर समितियों का निरंतर प्रयास है कि हर प्रकार से यात्रा के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं व यात्रियों द्वारा सरल व सुविधापूर्वक यात्रा की जा सके. जिससे वह एक अच्छा अनुभव प्रदेश से लेकर जाये, जिसके लिए लगातार बैठकों का दौर चल रहा है. इसी क्रम में बद्री-केदार मंदिर समिति की हाल ही में हुई बैठक के दौरान यात्रा से सम्बन्धित कई विषयों पर चर्चा की गयी, और साथ ही चारधाम यात्रा के दौरान गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए भी प्रस्ताव रखा गया है. मंदिर अधिकारी इस नियम को बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर कमेटी द्वारा मैनेज किया जाने वाले करीब 47 से 50 मंदिरों पर लागू करने की योजना बना रहे हैं. हालांकि कुछ जगहों पर इस फैसले को पहले ही औपचारिक रूप से मंजूरी मिल चुकी है. लेकिन कुछ मंदिरों के लिए अभी भी बातचीत चल रही है. गंगोत्री मंदिर को मैनेज करने वाली कमेटी ने पहले ही इस नियम का सपोर्ट करते हुए एक प्रस्ताव पास कर दिया है. वहीं गैर-हिंदुओं पर रोक के बावजूद सिख, जैन और बौद्ध धर्म को मानने वालों पर इस बैन का कोई असर नहीं पड़ेगा. बद्री- केदार मंदिर समिति का मानना है, कि भारत के संविधान के आर्टिकल 25 के तहत इन धर्म को कुछ कानूनी और सांस्कृतिक मामलों में हिंदू परंपराओं की एक बड़ी परिभाषा के हिस्से के रूप में माना जाता है. यानी कि इन धर्मों को मानने वालों को इस रोक से बाहर रखा गया है. जिसके बाद प्रदेश की सियासत में यह विषय एक राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है. विपक्ष का आरोप है कि धार्मिक स्थलों पर किसी पर रोक लगाने का किसी का कोई अधिकार नही है, वहीं सिख, जैन, बौद्ध को छोड़ अन्य समुदाय पर रोक लगाना केवल भाजपा सरकार की धार्मिक कट्टरता को दर्शाता है. जिसके बाद सियासी तीर चलना शुरु हो गये हैं.
प्रदेश की रीड की हड्डी कही जाने वाली चारधाम यात्रा को शुरू होने में कुछ ही हफ्ते शेष रह गये हैं. राज्य सरकार व मंदिर समितियां जोर शोर से तैयारी करते हुए नज़र आ रही है. लगातार हो रही सरकार व मंदिर समितियों की बैठकों के दौर में मंगलवार को बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की अध्यक्षता में हुई बद्री-केदार मंदिर समिति की बैठक के दौरान यात्रा से जुड़े कई बिन्दुओं पर चर्चा करने के साथ चारधाम यात्रा में गैरहिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है. जिसके बाद मंदिर समिति से जुड़े सदस्यों व कई तीर्थ पुरोहितों द्वारा इस कदम को सराहनीय भी बताया गया है. हालांकि मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि इस विषय पर अभी उनके पास पूरी जानकारी नहीं है लेकिन मंदिरों के हितधारकों से वार्तालाप करने के बाद ही आगे का कार्य किया जायेगा. लेकिन विपक्ष लगातार इस विषय को लेकर सत्ता पक्ष भाजपा पर सवाल खड़े करता दिखाई दे रहा है. विपक्ष का मानना है कि श्रद्धा व आस्था के बीच किसी को रोकने का कोई अधिकार किसी के पास नहीं है. तो वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष का मानना है कि अन्य धर्म से जुड़े लोग यदि चारधाम यात्रा के दौरान आते है तो उनकी आस्था भी यात्रा से जुड़ी होनी चाहिए और जो आस्था के खिलाफ है उनको रोकने के लिए यह नियम बनाया जा रहा है।
बद्री-केदार मंदिर समिति द्वारा चारधाम यात्रा के दौरान गैर हिंदुओं पर रोक लगाने के विषय ने आगामी चारधाम यात्रा के शुरू होने से पहले प्रदेश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है. विपक्ष लगातार सत्ता पक्ष भाजपा पर आरोप लगाता नज़र आ रहा है. विपक्ष का कहना है कि भाजपा लगातार धार्मिक विषयों के जरिये ही चुनावों में अपनी जीत पक्की करने की जद्दोजहद करती नज़र आती है. साथ ही भाजपा धार्मिक परंपराओं और आस्था को राजनीतिक रूप में बदलने का प्रयास भी कर रही है. वहीं विपक्ष की माने तो देश संविधान से चलता है और जिसके तहत देश का हर नागरिक कहीं भी जा सकता है.वहीं इसके बाद सत्ता पक्ष भाजपा ने विपक्ष पर पलटवार किया है और आस्था से जोड़ते हुए अपने बयानों को सामने रखा है.
बी,के,टी सी ने प्रदेश के 47 मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है, बद्रीनाथ और केदारनाथ भारत और सनातन धर्म के आस्था के केंद्र हैं. ऐसे में सवाल यही है कि प्रवेश धर्म के आधार पर नहीं बल्कि आस्था के आधार पर होना चाहिए. जो भी व्यक्ति सनातन और हिंदू धर्म में आस्था रखता है, उसका स्वागत भी होना चाहिए. कुल मिलाकर बद्री केदार मंदिर समिति के इस फैसले के बाद धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बहस शुरू हो गई है. बद्री केदार मंदिर समिति के गैर सनातनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध के फैसले के बाद उत्तराखंड में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं. मुख्यमंत्री ने कहना है कि सरकार बायलॉज देखकर और सभी हितधारकों से बातचीत के बाद ही इस पर अंतिम निर्णय लेगी.जिसके बाद अब सभी की नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है.