डिजिटल डेस्क- नैनीताल स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय की दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने राज्य के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PTCUL) के प्रबंध निदेशक पद पर पीसी ध्यानी की नियुक्ति को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2021 की उस नियमावली के खिलाफ की गई, जिसमें ऊर्जा के तीनों निगमों पिटकुल, यूपीसीएल और यूजेवीएनएल में प्रबंध निदेशक और निदेशक की नियुक्ति के लिए स्पष्ट योग्यता तय की गई है।
तकनीकी योग्यता अनिवार्य, कोर्ट का साफ संदेश
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि नियमावली के अनुसार मैनेजिंग डायरेक्टर पद पर केवल तकनीकी पृष्ठभूमि वाला व्यक्ति ही नियुक्त किया जा सकता है, जिसकी शैक्षणिक योग्यता इंजीनियरिंग में हो। कोर्ट के अनुसार, पीसी ध्यानी इस अनिवार्य अर्हता को पूरा नहीं करते थे, इसलिए उनकी नियुक्ति नियमों के विपरीत थी। सरकार की ओर से दलील दी गई कि कुछ मामलों में व्यावहारिक अनुभव को औपचारिक तकनीकी योग्यता के बराबर माना जा सकता है। लेकिन अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि स्पष्ट नियमों को दरकिनार कर अनुभव के आधार पर नियुक्ति करना वैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन है।
सरकार का कैबिनेट फैसला भी सवालों में
मामले में एक नया मोड़ तब आया जब 18 फरवरी को अदालत के आदेश के बाद राज्य सरकार ने 25 फरवरी को कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया कि ऊर्जा निगमों में गैर-तकनीकी व्यक्ति भी प्रबंध निदेशक बन सकेंगे। सरकार ने इसे अपनी कार्यपालिका शक्तियों के तहत लिया गया निर्णय बताया। हालांकि, 27 फरवरी को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि सरकार ने न केवल पूर्व आदेश की अनदेखी की, बल्कि लगभग तीन वर्षों से पद पर बने अधिकारी को हटाने में भी देरी की, जबकि वे योग्यता के मानकों पर खरे नहीं उतरते थे।
प्रिंसिपल सेक्रेटरी को अवमानना नोटिस
अदालत ने पावर डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी आर. मीनाक्षी सुंदरम को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए, क्योंकि विभाग 18 फरवरी के आदेश का पालन करने में विफल रहा। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश के बावजूद पीटीसीयूएल के एमडी को पद से नहीं हटाया गया, जो न्यायालय की अवमानना के दायरे में आता है। इससे पहले मीनाक्षी सुंदरम ने कहा था कि सरकार आदेश का अध्ययन कर रही है और विधि विभाग की सलाह के बाद कार्रवाई की जाएगी। लेकिन अदालत ने माना कि यह देरी और अनुपालन में विफलता न्यायिक आदेश की अवहेलना है।