डिजिटल डेस्क- दिल्ली के कथित आबकारी (शराब) नीति घोटाले मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बरी कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि मामले में साजिश के पर्याप्त सबूत नहीं मिले और बिना पुख्ता प्रमाण के आरोप सिद्ध नहीं किए जा सकते। फैसला सुनाते ही कोर्ट रूम का माहौल भावुक हो गया। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया अपने वकील हरिहरन के गले लग गए। केजरीवाल इस दौरान भावुक नजर आए। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच अधिकारी को तथ्यों को बेहतर तरीके से पेश करना चाहिए था। जज ने यहां तक कहा कि “मैं पहली बार ऐसी चार्जशीट देख रहा हूं जिसमें इतनी खामियां हैं।”
‘बिना सबूत के आरोप साबित नहीं होता’
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी नंबर 8 और 18 मनीष सिसोदिया और अरविंद केजरीवाल के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। इसलिए उन्हें आरोपों से मुक्त किया जाता है। कोर्ट ने साफ कहा कि केवल आरोप लगाने से अपराध साबित नहीं होता, उसके लिए ठोस प्रमाण आवश्यक हैं। मनीष सिसोदिया उस समय दिल्ली सरकार में उपमुख्यमंत्री थे और आबकारी विभाग उनके पास था। इसी दौरान नई शराब नीति 2021-22 लागू की गई थी, जिस पर अनियमितताओं और कथित घोटाले के आरोप लगे। सिसोदिया ने इस मामले में लंबा समय जेल में बिताया था।
ED और CBI की कार्रवाई
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई दोनों ने केस दर्ज किया था। ED ने 21 मार्च 2024 को अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया था, जब वे दिल्ली के मुख्यमंत्री थे। केजरीवाल 13 जुलाई 2024 को जेल से बाहर आए थे। मामले में कुल 23 लोगों को आरोपी बनाया गया था। केजरीवाल और सिसोदिया दोनों को गिरफ्तार किया गया, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी। फैसले के समय भी दोनों जमानत पर ही बाहर थे। अब अदालत ने उन्हें पूरी तरह बरी कर दिया है।
राजनीतिक असर और चुनावी मुद्दा
दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान शराब नीति घोटाला बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना था। भारतीय जनता पार्टी ने आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया था कि इस नीति से सरकार को 2,026 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और लाइसेंस जारी करने में अनियमितताएं बरती गईं। AAP नेताओं ने शुरुआत से ही इन आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दिया था। उनका कहना था कि यह मामला उन्हें बदनाम करने और राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाने के लिए उठाया गया। अब कोर्ट के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के लिए यह बड़ी राहत और राजनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी का कहना है कि न्यायपालिका के फैसले ने साबित कर दिया है कि उनके नेताओं पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद थे।