KNEWS DESK- हरियाणा में चर्चित बैंक घोटाले के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मंगलवार देर रात बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में मुख्य आरोपी रिभव ऋषि समेत कुल पांच लोगों को छापेमारी के बाद हिरासत में लिया गया। मामला IDFC First Bank से जुड़ा है, जिसमें सरकारी खातों से सैकड़ों करोड़ रुपये की निकासी का आरोप है।
जांच में सामने आया है कि रिभव ऋषि पहले IDFC फर्स्ट बैंक में मैनेजर रह चुका है। फिलहाल वह AU Small Finance Bank में चंडीगढ़ के पास जीरकपुर शाखा में तैनात था। आरोप है कि उसने फर्जी कंपनियां बनाकर सरकारी धन के गबन की साजिश रची।
बताया जा रहा है कि रिभव ने अपने साथियों के साथ मिलकर हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के खातों से करीब 590 करोड़ रुपये निकाल लिए। गिरफ्तार आरोपियों में रिभव ऋषि के अलावा अभिषेक सिंगला, अभय, स्वाति और एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं।
ACB ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि गिरफ्तार आरोपियों में कितने बैंक कर्मचारी हैं और कितने बाहरी लोग। सूत्रों के मुताबिक कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
चौंकाने वाली बात यह है कि पंचकूला में मुख्यालय होने के बावजूद 18 सरकारी विभागों के खाते चंडीगढ़ स्थित बैंकों में खोले गए थे। यह सवाल भी उठ रहा है कि संबंधित अधिकारियों ने ऐसा क्यों किया और क्या उन्हें इससे कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभ मिला।
सूत्रों के अनुसार, सरकार को पिछले साल जुलाई में ही अनियमितताओं की जानकारी मिल गई थी। इसके बाद वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) ने सभी विभागों को सतर्क करते हुए पत्र जारी किया था।
इस पूरे मामले पर चल रहे सियासी घमासान के बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने विधानसभा में बताया कि IDFC फर्स्ट बैंक से ब्याज सहित पूरी राशि की रिकवरी कर ली गई है।
सरकार ने IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को इंपैनल्ड करने की प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। अब यह जांच करेगी कि किन परिस्थितियों में सरकारी विभागों के खाते इन बैंकों में खोले गए और पूरे फ्रॉड की जिम्मेदारी किस स्तर तक जाती है। मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।