डिजिटल डेस्क- बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देकर सुर्खियों में आए 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने अब सक्रिय राजनीति में कदम रख दिया है। श्रीकृष्ण की नगरी वृंदावन से उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा’ की घोषणा की और पार्टी का चुनाव चिन्ह भी जारी किया। उनके इस कदम को प्रदेश की राजनीति में एक नए घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। अलंकार अग्निहोत्री ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा देते हुए यूजीसी एक्ट को ‘काला कानून’ बताया था। साथ ही उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के कथित अपमान और संत समाज के साथ हुए व्यवहार को लेकर गंभीर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि वे अपने समाज और संतों के साथ हो रहे अन्याय को सहन नहीं कर सकते, इसलिए उन्होंने प्रशासनिक सेवा छोड़ने का निर्णय लिया।
कार्यक्रम के दौरान भाजपा पर बोला तीखा हमला
वृंदावन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अलंकार ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पार्टी को ब्राह्मण और संत विरोधी करार देते हुए कहा कि माघ मेले में संतों के साथ अन्याय हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि बटुकों की शिखा खींची गई और उन्हें गिराकर पीटा गया। उन्होंने भाजपा को ‘विदेशी जनता पार्टी’ तक कह दिया। उनके इन बयानों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। अलंकार अग्निहोत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि देश में ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है जिससे समाज जाति-जाति में बंट जाए और भविष्य में सिविल वॉर जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने ब्राह्मण वर्ग से जुड़े सांसदों और विधायकों पर भी निशाना साधा। उनका कहना था कि जो जनप्रतिनिधि अपने नाम के साथ ब्राह्मण सरनेम लगाकर घूम रहे हैं, वे कॉरपोरेट कर्मचारियों की तरह व्यवहार कर रहे हैं और आलाकमान पर निर्भर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज के मुद्दों पर वे चुप्पी साधे हुए हैं।
डीएम बरेली पर लगाए थे गंभीर आरोप
इस्तीफे के बाद अलंकार ने बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि डीएम ने उन्हें करीब 20 मिनट तक बंधक बनाए रखा और दो घंटे के भीतर सरकारी आवास खाली करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि डीएम के पास लखनऊ से फोन आया था। अलंकार का कहना है कि उन्होंने अपने इस्तीफे के पत्र में कारणों का स्पष्ट उल्लेख किया है। ‘राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा’ के गठन के साथ ही अलंकार ने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी सामाजिक न्याय, धार्मिक आस्था और अधिकारों की रक्षा को मुख्य मुद्दा बनाएगी। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पार्टी आगामी चुनावों में किस स्तर पर भागीदारी करेगी, लेकिन उनके बयान और राजनीतिक तेवर बताते हैं कि वे आक्रामक शैली में अपनी बात रखने वाले हैं।