डिजिटल डेस्क- महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय राजनीति के दिग्गज नेता शरद पवार की सेहत एक बार फिर चिंताजनक हो गई है। उन्हें रविवार सुबह पुणे के रुबी हॉल क्लिनिक में भर्ती कराया गया। यह तबीयत की बिगड़ती स्थिति उनके समर्थकों और परिवार के लिए चिंता का कारण बन गई है, क्योंकि पिछले सप्ताह भी उनकी तबीयत खराब होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। उस समय चार दिन के इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी गई थी। जानकारी के मुताबिक, रविवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उनकी हालत का आकलन किया। उनके साथ बेटी और सांसद सुप्रिया सुले भी मौजूद हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उनके पिता को थोड़ी कमजोरी महसूस हो रही है और शरीर में पानी की कमी भी देखी गई है। सुप्रिया सुले ने कहा कि कुछ जरूरी मेडिकल टेस्ट किए जाने हैं और डॉक्टर उनकी निगरानी में हैं।
अजित पवार की मौत के बाद से सेहत में आने लगी गिरावट
सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ समय से शरद पवार की सेहत लगातार प्रभावित रही है। खासकर उनके करीबी रिश्तेदार अजित पवार के निधन के बाद से उनकी तबीयत में गिरावट आई है। अजित पवार के निधन ने परिवार में गहरा सदमा पैदा किया था और इस घटना के बाद से ही शरद पवार बार-बार कमजोरी और स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों की वजह से चर्चा में रहे हैं। पिछले सप्ताह भी उन्हें बारामती से पुणे ले जाया गया था, जब सीने में कफ की शिकायत के कारण डॉक्टरों की टीम उनके घर पर गई थी और प्राथमिक जांच के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। उस दौरान उनकी हालत स्थिर हुई थी और कुछ दिन इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी। लेकिन अब एक बार फिर उनकी तबीयत बिगड़ने से परिवार और समर्थकों में चिंता बढ़ गई है।
फिलहाल हालत स्थिर
डॉक्टरों ने फिलहाल उनकी हालत को स्थिर बताया है, लेकिन यह भी कहा गया है कि उन्हें कुछ जरूरी मेडिकल टेस्ट करवाने होंगे। अस्पताल प्रशासन और परिवार के लोग लगातार उनकी देखभाल कर रहे हैं और चिकित्सकीय टीम उन्हें पूरी निगरानी में रख रही है। राजनीतिक और सामाजिक circles में उनकी तबीयत को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। उनके समर्थक और महाराष्ट्र की जनता सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से उनके स्वास्थ्य के बारे में अपडेट मांग रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 80 वर्ष से अधिक उम्र के नेताओं की स्वास्थ्य स्थिति अक्सर अस्थिर रहती है, इसलिए नियमित मेडिकल निगरानी जरूरी है।