KNEWS DESK- उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और विकास कार्यों को लेकर सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि 1 मार्च से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही सभी विभाग सालभर की रणनीति तैयार कर लेते हैं और योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में चार मंत्रालयों ने सदन में कार्य अनुदान को लेकर अपनी बात रखी, जो सकारात्मक संकेत है। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय पर हल्की चुटकी लेते हुए सीएम ने कहा कि आंकड़ों में भ्रम की स्थिति पैदा करना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 2016-17 में राजकोषीय घाटा 4.39 प्रतिशत था, जो अब घटकर लगभग 2.9 प्रतिशत रह गया है। उनके अनुसार यह प्रदेश के सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन का प्रमाण है और इसी कारण बैंक भी उत्तर प्रदेश पर भरोसा जता रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने भ्रष्टाचार और वित्तीय ‘लीकेज’ पर प्रभावी अंकुश लगाया है। पारदर्शी व्यवस्था और कड़े वित्तीय अनुशासन के चलते प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिली है। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर में किया गया निवेश रोजगार सृजन करता है और प्रदेश की आय में वृद्धि करता है। सरकार का प्रयास है कि यूपी का पैसा यूपी में ही निवेश हो, जिससे स्थानीय स्तर पर उद्योग और स्वरोजगार को बढ़ावा मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस राज्य के पास मजबूत एमएसएमई सेक्टर होगा, वही अग्रणी बनेगा। मेरठ का ब्रास उद्योग, गोरखपुर की टेराकोटा कला, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और भदोही की कालीन जैसे उत्पादों को ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ योजना के जरिए वैश्विक पहचान मिली है। साथ ही विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत कारीगरों को टूल किट वितरित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया गया है।
सीएम योगी ने वर्ष 2017 में लघु एवं सीमांत किसानों की कर्जमाफी का उल्लेख करते हुए कहा कि 86 लाख किसानों का एक लाख रुपये तक का कर्ज बिना किसी बैंक या वित्तीय संस्था से ऋण लिए, बजट संसाधनों से माफ किया गया। इसे उन्होंने संसाधनों के कुशल प्रबंधन का उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि पीएलए (पर्सनल लेजर अकाउंट) प्रणाली में सुधार कर अनावश्यक धनराशि के डंप होने की प्रवृत्ति रोकी गई है और योजनाओं के लिए आवश्यकता अनुसार ही धन जारी किया जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइन का अक्षरशः पालन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार वर्ष 2016-17 में प्रदेश का क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) रेशियो 43-44 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 61-62 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि प्रदेश में जमा धन अब अधिक मात्रा में राज्य के भीतर ही निवेश हो रहा है। इससे उद्योग, व्यापार और रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और पूंजीगत निवेश की स्पष्ट रणनीति के कारण उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है और प्रदेश के प्रति देश-विदेश में सकारात्मक धारणा बनी है।