डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की एक अदालत ने शुक्रवार को एक ऐसे सनसनीखेज मामले में फैसला सुनाया है, जिसने पूरे देश की मानवता को झकझोर कर रख दिया है। अदालत ने चित्रकूट के निलंबित जूनियर इंजीनियर रामभवन कुशवाहा और उनकी पत्नी दुर्गावती को बच्चों का यौन शोषण करने और उनकी अश्लील वीडियो डार्कवेब पर बेचने के अपराध में फांसी की सजा सुनाई है। यह बांदा की न्यायिक इतिहास में पहला ऐसा मौका है जब किसी महिला आरोपी को मौत की सजा दी गई है। यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाल यौन शोषण के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करता है, जिसमें 34 मासूम बच्चे शिकार बने और 47 देशों में इसका कनेक्शन सामने आया। मामले की शुरुआत 31 अक्टूबर 2020 को हुई, जब इंटरपोल ने दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय को एक विस्तृत शिकायत भेजी। शिकायत में खुलासा हुआ कि आरोपी रामभवन तीन अलग-अलग मोबाइल नंबरों के जरिए डार्कवेब पर बच्चों की अश्लील वीडियो और फोटो 47 देशों में बेच रहा था।
2020 में किया गया था गिरफ्तार
सीबीआई ने तुरंत प्राथमिकी दर्ज करते हुए नवंबर 2020 में बांदा के नरैनी कस्बे से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से एक पेन ड्राइव बरामद हुई, जिसमें 34 वीडियो और 679 आपत्तिजनक तस्वीरें मौजूद थीं। जांच में सामने आया कि ये दोनों बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और आसपास के इलाकों से तीन साल तक के छोटे बच्चों को अपना निशाना बनाते थे। वे बच्चों का यौन शोषण करते थे और वीडियो बनाकर उन्हें डार्कवेब, सोशल मीडिया और वेबसाइटों पर बेचते थे। सीबीआई के सेवानिवृत्त अपर पुलिस अधीक्षक अमित कुमार द्वारा की गई इस गहन जांच के दौरान अदालत में कुल 74 गवाहों को पेश किया गया, जिनमें 24 पीड़ित बच्चे भी शामिल थे। पीड़ित बच्चों की गवाही ने मामले को बेहद संवेदनशील और गंभीर बना दिया था। सीबीआई के लोक अभियोजक दारा सिंह मीणा ने बताया कि इंटरपोल की तीन ई-मेल शिकायतों के आधार पर एकत्रित सबूत इतने मजबूत थे कि अदालत को कोई शक नहीं रहा।
मृत्यू दंड से उचित कोई दंड नहीं….- कोर्ट
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रदीप कुमार मिश्रा ने अपने फैसले में कहा कि यह अपराध इतना घिनौना है कि मौत की सजा के अलावा और कोई उचित दंड नहीं है। बांदा अदालत ने पहले भी हत्या, अपहरण और गैंगरेप जैसे मामलों में करीब 23 लोगों को फांसी की सजा सुनाई है, लेकिन किसी महिला को यह सजा मिलना इतिहास में पहली बार हुआ है। जज मिश्रा की अदालत ने पिछले छह महीनों में यह चौथी बार मौत की सजा सुनाई है। यह फैसला उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में बाल यौन शोषण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की एक मिसाल बनेगा।