KNEWS DESK- हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को ढुण्ढिराज चतुर्थी या विनायक चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगवान गणेश के विशेष स्वरूप की पूजा के लिए समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने पर सभी विघ्न दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

गणपति बप्पा को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य से पहले उनकी पूजा की परंपरा है, इसलिए यह चतुर्थी विशेष फलदायी मानी जाती है।
बप्पा को अर्पित करें ये प्रिय भोग
विनायक चतुर्थी पर गणेश जी को उनके प्रिय पकवान अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं कौन-कौन से भोग चढ़ाने चाहिए:
मोदक
मोदक गणेश जी का सबसे प्रिय भोग माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार 21 मोदक अर्पित करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
लड्डू
बेसन या बूंदी के लड्डू भी बप्पा को अति प्रिय हैं। श्रद्धा और प्रेम से अर्पित किए गए लड्डू पूजा को पूर्णता प्रदान करते हैं।
दूर्वा घास
गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है। पूजा में 21 दूर्वा चढ़ाना शुभ और मंगलकारी माना जाता है।
नारियल
नारियल को शुभता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। पूजा में नारियल अवश्य शामिल करें।
गुड़ और चना
सरल और सात्विक भोग के रूप में गुड़-चना भी अर्पित किया जा सकता है। यह सादगी और श्रद्धा का प्रतीक है।
विनायक चतुर्थी की सरल पूजा विधि
- प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान को साफ कर गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- दीपक और धूप जलाएं।
- दूर्वा, फूल और सिंदूर अर्पित करें।
- “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
- अंत में भोग लगाकर आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
पूजा के दौरान मन में शुद्धता और श्रद्धा का भाव बनाए रखना आवश्यक है।
इन गलतियों से अवश्य बचें
- तुलसी अर्पित न करें – गणेश जी की पूजा में तुलसी चढ़ाना वर्जित माना गया है।
- बासी या अशुद्ध भोग न चढ़ाएं – केवल ताजा और शुद्ध भोजन ही अर्पित करें।
- क्रोध या नकारात्मक भावना से पूजा न करें – शांत और सकारात्मक मन से पूजा करें।
- चंद्र दर्शन से बचें – कुछ परंपराओं में चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन करना उचित नहीं माना जाता।
विनायक चतुर्थी का आध्यात्मिक महत्व
फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी को ढुण्ढिराज स्वरूप में गणपति की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह दिन आत्मशुद्धि, सकारात्मकता और नई शुरुआत का प्रतीक है। इस पावन अवसर पर श्रद्धा, विश्वास और प्रेम से बप्पा की आराधना करें और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को मंगलमय बनाएं।