डिजिटल डेस्क- बिहार में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बार 10 राज्यों की 37 सीटों पर चुनाव होना है, जिनमें बिहार की पांच सीटें भी शामिल हैं। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों के रिटायर होने के बाद चुनाव कराया जा रहा है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अपना उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर दिया है, जिससे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की रणनीति को बड़ा झटका लग सकता है। बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं। रिटायर होने वाले नेताओं में हरिवंश नारायण सिंह और राम नाथ ठाकुर (जनता दल-यूनाइटेड), प्रेम चंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह (RJD) तथा उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। मौजूदा विधानसभा संख्या के हिसाब से सत्ताधारी एनडीए के पास पांच में से चार सीटें आसानी से जीतने का आंकड़ा मौजूद है।
विपक्ष के पास कुल 35 विधायक
विपक्षी ग्रैंड अलायंस में RJD, कांग्रेस और तीन वाम दल शामिल हैं। कुल मिलाकर इनके पास 35 विधायक हैं जिनमें RJD के 25, कांग्रेस के 6, CPI(ML) लिबरेशन के 2 और CPI व इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के एक-एक विधायक हैं। बिहार में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता होती है। ऐसे में यदि AIMIM के पांच और BSP के एक विधायक विपक्ष के उम्मीदवार को समर्थन दें, तो 41 का आंकड़ा पूरा हो सकता है और विपक्ष पांचवीं सीट जीत सकता है। लेकिन अब समीकरण बदलते दिख रहे हैं। AIMIM ने खुद अपना उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। पार्टी के बिहार अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने घोषणा की है कि AIMIM राज्यसभा चुनाव लड़ेगी और उन्होंने RJD सहित अन्य विपक्षी दलों से समर्थन की अपील की है। इस कदम को राजनीतिक विश्लेषक 2020 विधानसभा चुनाव के दौरान AIMIM और RJD के बीच बने तनाव की पृष्ठभूमि में देख रहे हैं।
2020 में की थी राजद के साथ गठबंधन की कोशिशें
2020 में AIMIM ने RJD के साथ गठबंधन की कोशिश की थी। पार्टी प्रतिनिधि समर्थन मांगने के लिए लालू प्रसाद यादव के आवास तक गए थे, लेकिन गठबंधन का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद चुनावी प्रचार के दौरान दोनों दलों के बीच तीखी बयानबाजी हुई। उस चुनाव में AIMIM ने पांच सीटें जीती थीं, जबकि RJD को 25 सीटें मिली थीं। सूत्रों के अनुसार, RJD अपने मौजूदा राज्यसभा सदस्य अमरेंद्र धारी सिंह को फिर से उम्मीदवार बनाने पर विचार कर रही थी। लेकिन AIMIM की दावेदारी ने पांचवीं सीट की संभावनाओं को जटिल बना दिया है। यदि विपक्ष एकजुट नहीं हुआ, तो एनडीए को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिल सकता है।