KNEWS DESK – केरल विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने इस बार बेहद सख्त रणनीति अपनाई है। पिछली हार से सबक लेते हुए पार्टी ने उम्मीदवार चयन के लिए कड़े नियम तय किए हैं, ताकि चुनावी मैदान में सिर्फ मजबूत और जीत सकने वाले चेहरों को उतारा जा सके।
टिकट के लिए नए नियम क्या हैं?
पार्टी सूत्रों के मुताबिक पिछले विधानसभा चुनाव में 5 हजार से अधिक वोटों से हारने वाले उम्मीदवार को दोबारा टिकट नहीं मिलेगा। जो नेता लगातार दो चुनाव हार चुके हैं, उन्हें भी इस बार मौका नहीं दिया जाएगा। किसी भी वर्तमान सांसद को विधानसभा चुनाव नहीं लड़वाया जाएगा।
हालांकि मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर पार्टी ने लचीलापन रखा है। चुनाव जीतने के बाद विधायकों की राय से मुख्यमंत्री का चयन होगा और वह विधायक या सांसद दोनों में से कोई भी हो सकता है।
‘वन सीट–वन टिकट’ फॉर्मूला और एडजस्टमेंट पॉलिसी
अगर किसी सीट पर एक से अधिक मजबूत दावेदार हैं, तो जिसे टिकट नहीं मिलेगा, उसे सरकार बनने पर बोर्ड या निगम में जिम्मेदारी देने का आश्वासन दिया जाएगा।
लेकिन दूसरी तरफ सख्त संदेश भी है, जिसे टिकट मिलेगा और वह चुनाव हार जाता है, उसे सरकार में किसी भी तरह से एडजस्ट नहीं किया जाएगा।
केंद्रीय स्क्रीनिंग कमेटी और केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) को इन्हीं दिशानिर्देशों के तहत उम्मीदवारों के चयन का निर्देश दिया गया है।
पिछली हार से सबक
केरल में पिछली बार पांच साल में सरकार बदलने का ट्रेंड टूटा था और कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ को बड़ा झटका लगा था। वाम मोर्चे ने सत्ता बरकरार रखी। इसी पृष्ठभूमि में कांग्रेस इस बार जोखिम लेने के बजाय ‘विनिंग एबिलिटी’ पर फोकस कर रही है।
केरल की सियासत में बढ़ी हलचल
आगामी चुनाव को लेकर राज्य की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। हाल ही में Communist Party of India (Marxist) (माकपा) से जुड़ी दो चर्चित हस्तियां कांग्रेस के मंच पर नजर आईं।
Prem Kumar कोट्टायम के नागमपदम इंडोर स्टेडियम में आयोजित केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के ‘संस्कार उत्सव 2026’ कार्यक्रम में दिखाई दिए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे, न कि किसी राजनीतिक मंच पर।
गौरतलब है कि हाल ही में उन्हें Kerala State Chalachitra Academy के अध्यक्ष पद से हटाए जाने को लेकर उन्होंने राज्य सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया था।
इसी तरह पलक्कड़ में वरिष्ठ माकपा नेता वी.एस. अच्युतानंदन के पूर्व निजी सहायक सुरेश भी विपक्ष के नेता सतीशन के नेतृत्व में कांग्रेस की ‘पुथुयुग यात्रा’ में शामिल हुए।