डिजिटल डेस्क- इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में रोबोट डॉग को लेकर उठे विवाद के बाद अब एक और मुद्दा काफी गरम हो गया है। इस बार मामला ड्रोन सॉकर को लेकर किए गए दावों का है। भारतीय युवा कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा ‘भारत का पहला ड्रोन सॉकर’ पूरी तरह से कैंपस में विकसित करने का दावा झूठा और भ्रामक है। यूथ कांग्रेस का कहना है कि यूनिवर्सिटी ने जिस ड्रोन सॉकर को ‘पूरी तरह से स्वदेशी’ बताया है, वह वास्तव में दक्षिण कोरिया में विकसित मॉडल से मेल खाता है। उनका तर्क है कि इसे भारत का पहला पूरी तरह से निर्मित ड्रोन सॉकर एरिना बताना गलत है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए एक वीडियो में यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर यह कहते हुए दिखाई देती हैं कि यह सॉकर बॉल के आकार का ड्रोन सिस्टम पूरी तरह से डिजाइन और विकसित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इसे इंजीनियरिंग से लेकर एप्लीकेशन तक सब कुछ कैंपस में ही किया गया है। साथ ही, इसको भारत का पहला ड्रोन सॉकर एरिना भी बताया गया।
ड्रोन सॉकर क्या है?
ड्रोन सॉकर एक नई तकनीक आधारित खेल है, जिसमें गेंद के आकार के सुरक्षात्मक ढांचे में बंद ड्रोन को उड़ाकर गोल किए जाते हैं। यह खेल दक्षिण कोरिया में बहुत लोकप्रिय हुआ है और अब कई देशों में टेक्नोलॉजी और स्पोर्ट्स के संयोजन के रूप में अपनाया जा रहा है। अगर यूथ कांग्रेस के आरोप सही हैं, तो यह सवाल उठता है कि क्या यूनिवर्सिटी ने विदेशी मॉडल को आयात कर उसका प्रदर्शन किया, या फिर उसमें कुछ स्थानीय संशोधन भी किए गए। इस संबंध में अभी यूनिवर्सिटी की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।
पहले भी हुआ था विवाद
इससे पहले समिट में प्रदर्शित एक रोबोट डॉग को लेकर भी विवाद हुआ था। आरोप था कि वह डिवाइस चीनी तकनीक पर आधारित था। उस प्रकरण के शांत होने से पहले ही अब ड्रोन सॉकर को लेकर नया विवाद सामने आ गया है। यूथ कांग्रेस ने इस मुद्दे को केंद्र सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन से भी जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि यदि विदेशी तकनीक को स्वदेशी बताकर पेश किया जाता है, तो यह आत्मनिर्भरता के दावों पर प्रश्नचिह्न लगाता है।