पुणे के पास ‘उड़ता पत्थर’ का रहस्य: खेड़ शिवापुर की दरगाह बनी आस्था का प्रतीक

डिजिटल डेस्क- महाराष्ट्र के पुणे से करीब 30 किलोमीटर दूर पुणे–सातारा हाईवे पर स्थित खेड़ शिवापुर इन दिनों फिर चर्चा में है। यहां मौजूद हज़रत क़मर अली दरवेश दरगाह अपने ‘हवा में उठने वाले पत्थर’ की मान्यता के कारण देश-विदेश के लोगों को आकर्षित करती है। हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु इस दरगाह में पहुंचते हैं कुछ इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए, तो कुछ दुआ और सुकून की तलाश में। दरगाह परिसर के भीतर रखा लगभग 70 किलो वजनी पत्थर यहां की सबसे बड़ी पहचान है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, जब ठीक 11 लोग अपनी उंगलियों से पत्थर को छूते हैं और एक स्वर में “या कमर अली दरवेश” का उच्चारण करते हैं, तो पत्थर जमीन से ऊपर उठ जाता है। दिलचस्प बात यह है कि यदि 11 से कम या अधिक लोग कोशिश करें तो पत्थर नहीं उठता। यही कारण है कि यह परंपरा रहस्य और आस्था का मिश्रण बन गई है। पहली बार इसे देखने वाले लोग अक्सर हैरान रह जाते हैं और इसे आध्यात्मिक अनुभव के रूप में याद करते हैं।

कौन थे हजरत कमर अली दरवेश?

मान्यता है कि हज़रत क़मर अली दरवेश दरगाह एक युवा सूफी संत थे, जिनका निधन मात्र 18 वर्ष की आयु में हो गया था। कहा जाता है कि उनमें असाधारण आध्यात्मिक शक्ति थी। स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, यह पत्थर उनकी रूहानी ताकत का प्रतीक है और उनकी बरकत से ही यह उठता है। दरगाह को लगभग 700 वर्ष पुराना माना जाता है। सदियों से यहां लोग अपनी मन्नतें लेकर आते रहे हैं। समय के साथ यह स्थान केवल धार्मिक स्थल नहीं रहा, बल्कि आस्था, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक एकता का केंद्र बन गया है।

विज्ञान बनाम आस्था

पत्थर के उठने की प्रक्रिया को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती रही हैं। कुछ लोग इसे सामूहिक संतुलन और तालमेल का परिणाम मानते हैं, तो कई इसे चमत्कार बताते हैं। हालांकि, इस परंपरा को लेकर कोई आधिकारिक वैज्ञानिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। फिर भी श्रद्धालुओं के लिए यह तर्क का विषय नहीं, बल्कि विश्वास का प्रश्न है। उनका कहना है कि यहां आकर उन्हें मानसिक शांति मिलती है और जीवन की परेशानियां हल्की महसूस होती हैं। हर वर्ष दरगाह में उर्स का आयोजन होता है, जिसमें हजारों जायरीन शामिल होते हैं। इस दौरान विशेष दुआएं, कव्वालियां और धार्मिक रस्में आयोजित की जाती हैं। पूरा परिसर रोशनी और आध्यात्मिक माहौल से भर जाता है। उर्स के समय यहां का वातावरण और भी भावनात्मक और उत्साहपूर्ण हो जाता है।

हर धर्म के लोगों की आस्था

इस दरगाह की एक खास बात यह भी है कि यहां केवल मुस्लिम ही नहीं, बल्कि हिंदू, सिख और अन्य धर्मों के लोग भी बड़ी संख्या में आते हैं। बिना किसी भेदभाव के लोग यहां सिर झुकाते हैं और दुआ मांगते हैं। खेड़ शिवापुर पुणे–सातारा हाईवे पर स्थित है, जिससे यहां बस, टैक्सी या निजी वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है। रास्ते की हरियाली और पहाड़ी दृश्य यात्रा को सुखद बना देते हैं।

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