चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा के दिन ही क्‍यों लगता है? क्या फाल्गुन पूर्णिमा की रात सचमुच “गायब” हो जाएगा चांद?

KNEWS DESK- 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा के दिन पड़ेगा। इसके बाद वर्ष का दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को सावन पूर्णिमा पर लगेगा। ऐसे में एक सामान्य प्रश्न उठता है—चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा को ही क्यों लगता है? ठीक वैसे ही जैसे सूर्य ग्रहण अमावस्या पर ही होता है। आइए इस खगोलीय घटना को सरल भाषा में समझते हैं।

चंद्र ग्रहण कब और कैसे लगता है?

चंद्र ग्रहण तब लगता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं और पृथ्वी बीच में होती है। इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा आंशिक या पूर्ण रूप से ढक जाता है।

यह स्थिति केवल पूर्णिमा के दिन ही बन सकती है, क्योंकि पूर्णिमा पर सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी के विपरीत दिशा में होते हैं। जब यह संरेखण बिल्कुल सटीक हो जाता है, तब चंद्र ग्रहण दिखाई देता है। इसी कारण चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा पर ही लगता है।

हर पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण क्यों नहीं लगता?

अब सवाल यह है कि जब हर पूर्णिमा पर सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीध में होते हैं, तो हर महीने चंद्र ग्रहण क्यों नहीं लगता? इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है कि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा (कक्षा-समतल) से लगभग 5 डिग्री झुकी हुई है। इस वजह से अधिकतर पूर्णिमा पर चंद्रमा पृथ्वी की छाया के ऊपर या नीचे से गुजर जाता है। केवल तब ही चंद्र ग्रहण होता है जब पूर्णिमा के समय चंद्रमा अपनी कक्षा के उन बिंदुओं (नोड्स) के पास हो, जहां उसकी कक्षा पृथ्वी की कक्षा को काटती है।

3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण: समय और सूतक काल

3 मार्च 2026 को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा, जो भारत में भी दिखाई देगा। भारत में दिखाई देने के कारण इसका सूतक काल मान्य होगा।

द्रिक पंचांग के अनुसार—

  • ग्रहण आरंभ: दोपहर 03:20 बजे
  • ग्रहण समाप्त: शाम 06:47 बजे
  • सूतक काल प्रारंभ: सुबह 06:20 बजे (ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले)
  • सूतक समाप्ति: ग्रहण समाप्त होने पर

धार्मिक मान्यता के अनुसार सूतक काल में पूजा-पाठ और शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है।

चंद्र ग्रहण एक अद्भुत खगोलीय घटना है, जो केवल पूर्णिमा पर ही संभव होती है। हालांकि हर पूर्णिमा पर ग्रहण नहीं लगता, क्योंकि चंद्रमा की कक्षा झुकी हुई होती है।

3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भी विशेष माना जा रहा है। यह अवसर हमें ब्रह्मांड की अद्भुत संरचना और उसकी सटीक व्यवस्था को समझने का मौका देता है।

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