KNEWS DESK- साल 2026 की शुरुआत ज्योतिष शास्त्र और पंचांग के अनुसार कई महत्वपूर्ण घटनाओं के साथ हो रही है। 17 फरवरी 2026 को न केवल साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है, बल्कि इसी दिन से अग्नि पंचक की अवधि भी शुरू हो रही है। इन दोनों घटनाओं का संयोग धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से शुभ नहीं माना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में गोचर करता है, उस समय को पंचक कहते हैं। पंचक की अवधि लगभग पांच दिन की होती है।
अग्नि पंचक विशेष रूप से आग से जुड़ी घटनाओं और दुर्घटनाओं के लिए जाना जाता है। इस दौरान आगजनी, दुर्घटनाएं और विवादों की संभावना बढ़ जाती है।
सूर्य ग्रहण और अग्नि पंचक का संयोग
सूर्य ग्रहण– सूर्य ऊर्जा और आत्मा का प्रतीक है। ग्रहण के दौरान सूर्य की पीड़ा का असर मानव जीवन और वातावरण पर पड़ सकता है।
अग्नि पंचक– मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभाव को बढ़ाता है, जिससे क्रोध, दुर्घटनाएं और तनाव की संभावना अधिक होती है।
इस प्रकार, 17 फरवरी का दिन दोनों अशुभ घटनाओं के संयोग के कारण विशेष सावधानी की मांग करता है।
अग्नि पंचक के दौरान संभावित खतरे
दुर्घटनाओं में वृद्धि– मशीनरी, औजार और आग से संबंधित घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
क्रोध और विवाद– लोगों में गुस्सा और उत्तेजना अधिक होती है, जिससे आपसी संबंधों और सामाजिक स्तर पर तनाव पैदा हो सकता है।
प्राकृतिक आपदाएं– भूकंप, आगजनी और अन्य प्राकृतिक घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
इस दौरान क्या न करें?
निर्माण कार्य– घर की छत बनवाना या दक्षिण दिशा की यात्रा करना वर्जित है।
ईंधन इकट्ठा करना– लकड़ी, घास या अन्य ज्वलनशील सामग्री जमा न करें।
नई शुरुआत– ग्रहण और पंचक के दौरान किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य जैसे गृह प्रवेश, मुंडन या व्यवसाय की शुरुआत न करें।
अग्नि पंचक से बचाव के उपाय
हनुमान चालीसा का पाठ– मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए हनुमान जी की आराधना करें।
दान-पुण्य– सूर्य ग्रहण के सूतक काल और ग्रहण के बाद अनाज, तिल और गुड़ का दान करें।
सावधानी बनाए रखें– वाहन चलाते समय सतर्क रहें और विवादों से दूर रहें।