Mahashivratri: महाशिवरात्रि के अवसर पर संगम में स्नान करने वालों का लगा तांता

KNEWS DESK- गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम तट पर सजा विश्वविख्यात माघ मेला अपने 44वें और अंतिम दिन आस्था के चरम पर पहुंच गया है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर त्रिवेणी संगम में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। ब्रह्म मुहूर्त से ही संगम के घाटों पर ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के बीच श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे हैं।

मेला अधिकारी ऋषिराज के अनुसार सुबह 7 बजे तक 16 लाख से अधिक श्रद्धालु स्नान कर चुके थे। प्रशासन का अनुमान है कि शाम तक यह आंकड़ा एक करोड़ के करीब पहुंच सकता है। महाशिवरात्रि के इस छठे और अंतिम स्नान पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।

इस बार ग्रह-नक्षत्रों का विशेष संयोग महाशिवरात्रि को और अधिक फलदायी बना रहा है। मान्यता है कि इस दिन संगम स्नान के साथ अन्न, वस्त्र और स्वर्ण दान करने से कई गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इसी विश्वास के साथ देश-विदेश से श्रद्धालु संगम तट पर पहुंचे हैं।

मेला क्षेत्र में करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबे अस्थायी घाट बनाए गए हैं, जहां श्रद्धालु सुव्यवस्थित तरीके से स्नान कर रहे हैं। प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए हैं, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

सुरक्षा के लिहाज से मेला क्षेत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है। यूपी पुलिस, पीएसी और आरएएफ के जवान तैनात हैं, जबकि एटीएस कमांडो भी हर गतिविधि पर नजर रखे हुए हैं। पूरे मेला क्षेत्र में लगभग 400 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें 150 से अधिक एआई आधारित कैमरे शामिल हैं। वरिष्ठ अधिकारी लगातार ग्राउंड जीरो पर निगरानी बनाए हुए हैं।

संगम स्नान के बाद श्रद्धालु शहर के प्रमुख शिवालयों की ओर रुख कर रहे हैं। मनकामेश्वर मंदिर समेत अन्य पौराणिक मंदिरों में भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए सुबह से ही लंबी कतारें लगी हैं। मंदिरों में भी सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर विशेष प्रबंध किए गए हैं।

माघ मेला 2026 इस बार ऐतिहासिक रहा है। अब तक 22 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके हैं, जो अपने आप में एक नया कीर्तिमान है। महाशिवरात्रि के इस अंतिम स्नान पर्व के साथ ही मेले का औपचारिक समापन हो जाएगा, लेकिन आस्था और श्रद्धा की यह गूंज श्रद्धालुओं के मन में लंबे समय तक बनी रहेगी।

संगम की रेती पर सजी आस्था की यह अनूठी तस्वीर एक बार फिर साबित करती है कि भारतीय संस्कृति में धर्म, परंपरा और विश्वास की जड़ें कितनी गहरी हैं।

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