KNEWS DESK- PM मोदी आज दोपहर 1:30 बजे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की नई इमारत ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन-1’ व ‘कर्तव्य भवन-2’ का उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन के बाद वह शाम 6 बजे सेवा तीर्थ परिसर में एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। सरकार के अनुसार, यह कदम भारत की प्रशासनिक संरचना को आधुनिक, एकीकृत और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है।
करीब 2.26 लाख वर्ग फुट में फैले सेवा तीर्थ के निर्माण पर 1,189 करोड़ रुपये की लागत आई है। इस परिसर में तीन मुख्य इमारतें—सेवा तीर्थ-1, सेवा तीर्थ-2 और सेवा तीर्थ-3—शामिल हैं। सेवा तीर्थ-1 में प्रधानमंत्री कार्यालय स्थित होगा, जबकि सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय का नया मुख्यालय बनाया गया है। सेवा तीर्थ-3 में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के कार्यालय स्थापित किए गए हैं। पहले ये सभी विभाग अलग-अलग स्थानों से संचालित होते थे।
सेवा तीर्थ को ‘ओपन फ्लोर’ कॉन्सेप्ट पर विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय, पारदर्शिता और कार्यकुशलता को बढ़ावा देना है। इमारत को एन्क्रिप्टेड संचार प्रणालियों, उन्नत साइबर सुरक्षा नेटवर्क और एकीकृत सुरक्षा ढांचे से लैस किया गया है। साथ ही यह भवन भूकंप प्रतिरोधी तकनीक के अनुरूप निर्मित है।
कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 में कानून, रक्षा, वित्त, स्वास्थ्य, कृषि सहित कई प्रमुख मंत्रालयों के कार्यालय एकीकृत रूप से स्थापित किए गए हैं। इन परिसरों में डिजिटल रूप से एकीकृत कार्यस्थल, संरचित सार्वजनिक संपर्क क्षेत्र और केंद्रीकृत स्वागत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक सुगम और पारदर्शी बन सकें।
दोनों भवन परिसरों को 4-स्टार GRIHA (ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटेड हैबिटैट असेसमेंट) मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है। इनमें नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियां, जल संरक्षण उपाय, अपशिष्ट प्रबंधन समाधान और उच्च-प्रदर्शन वाली भवन संरचनाएं शामिल हैं। सुरक्षा के लिहाज से भी यहां स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल, उन्नत निगरानी नेटवर्क और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली स्थापित की गई है।
PMO द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि यह उद्घाटन भारत की शासन प्रणाली में एक मील का पत्थर है। दशकों तक सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में फैले पुराने और अलग-अलग कार्यालयों के कारण समन्वय की चुनौतियां, परिचालन अक्षमताएं और रखरखाव लागत में वृद्धि जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। नए भवन परिसरों के माध्यम से प्रशासनिक कार्यों को एक स्थान पर समेकित कर इन चुनौतियों का समाधान किया गया है, जिससे भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक और जन-केंद्रित शासन व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।