डिजिटल डेस्क- पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में गुरुवार को 13वें संसदीय चुनाव और रेफरेंडम 2026 के लिए मतदान कराया गया। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में हुए इस पहले आम चुनाव को देश की राजनीतिक दिशा तय करने वाला अहम मोड़ माना जा रहा है। मतदाताओं ने दो अलग-अलग मतपत्रों के जरिए संसद के लिए प्रतिनिधि चुनने के साथ-साथ संविधान में प्रस्तावित बुनियादी बदलावों पर ‘हां’ या ‘नहीं’ में अपनी राय दी।हालांकि अधिकांश जगहों पर मतदान शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कुछ जिलों में हिंसा और धमाकों की घटनाएं सामने आईं। दो जिलों में बम धमाके की खबर है, जिनमें एक बीएनपी नेता की मौत हो गई। अलग-अलग इलाकों में छिटपुट झड़पों में दो दर्जन से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा मतदान के दौरान बीमारी की वजह से चार लोगों की मौत की भी सूचना है।
2 बजे तक हुआ 47.91 प्रतिशत मतदान
इलेक्शन कमीशन के सीनियर सेक्रेटरी अख्तर अहमद ने बताया कि 36,031 मतदान केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार दोपहर 2 बजे तक 47.91 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। आयोग ने कहा कि सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और अधिकांश केंद्रों पर प्रक्रिया सामान्य रही। बीएनपी चेयरमैन तारिक रहमान ने कहा कि उनकी पार्टी चुनाव परिणाम स्वीकार करेगी, बशर्ते मतदान स्वतंत्र, निष्पक्ष और विवादों से मुक्त हो। उन्होंने कहा, “अगर चुनाव फ्री और फेयर हैं तो हम नतीजों को क्यों नहीं मानेंगे? सभी पार्टियां इसे स्वीकार करेंगी।”
मतदान प्रक्रिया पर जमात-ए-इस्लामी ने उठाए सवाल
दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी ने मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के अमीर शफीकुर रहमान ने आरोप लगाया कि देश के विभिन्न हिस्सों में फर्जी वोट डालने और पोलिंग सेंटर्स पर कब्जा करने की कोशिश की गई। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि पोलिंग एजेंटों पर हमले हुए हैं, महिलाओं को परेशान किया गया है और बैलेट पेपर छीनने की घटनाएं सामने आई हैं। जमात ने मतदाताओं से अपील की कि वे नतीजे आने तक मतदान केंद्रों की सुरक्षा में सहयोग करें और किसी भी तरह की गड़बड़ी का विरोध करें। पार्टी ने कानून-व्यवस्था एजेंसियों से सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि जनता के वोट की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।