भारत बंद: सड़कों पर उतरे मजदूर-किसान, कई राज्यों में बसें थमीं, जानिए कहां-क्या हुआ प्रभावित…

डिजिटल डेस्क- केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में आज देशभर में ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों द्वारा बुलाया गया भारत बंद जारी है। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच का दावा है कि इस हड़ताल में करीब 30 करोड़ मजदूर हिस्सा ले रहे हैं। सुबह से ही कई राज्यों में बंद का असर सड़कों, बाजारों और सरकारी दफ्तरों में साफ दिखाई दे रहा है। कई जगहों पर प्रदर्शन, रैलियां और धरने आयोजित किए जा रहे हैं। सबसे अधिक असर परिवहन सेवाओं पर पड़ा है। कई राज्यों में राज्य परिवहन निगम की बसें डिपो में खड़ी रहीं, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ऑटो और स्थानीय परिवहन सेवाएं भी कई शहरों में आंशिक रूप से प्रभावित रहीं। कुछ इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर विरोध दर्ज कराया, जिसके चलते यातायात बाधित हुआ। हालांकि, लंबी दूरी की ट्रेनों और हवाई सेवाओं पर बड़े स्तर पर असर की खबर नहीं है।

सरकारी बैंकों में दिख रहा असर, निजी बैंकों में कामकाज सामान्य

बैंकिंग सेवाओं पर भी बंद का असर देखने को मिला है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कई शाखाओं में कामकाज प्रभावित रहा, जबकि निजी बैंक और एटीएम सेवाएं अधिकांश स्थानों पर सामान्य रूप से चलती रहीं। सरकारी दफ्तरों में भी कर्मचारियों की उपस्थिति कम रहने से कामकाज की रफ्तार धीमी पड़ गई। कई विभागों में आम जनता को जरूरी कार्यों के लिए इंतजार करना पड़ा। औद्योगिक क्षेत्रों और फैक्ट्रियों में भी उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। कई औद्योगिक क्लस्टरों में श्रमिकों ने काम बंद कर प्रदर्शन में हिस्सा लिया। वहीं, बाजारों और थोक मंडियों में मिला-जुला असर देखने को मिला। कुछ शहरों में बाजार पूरी तरह बंद रहे, जबकि कई स्थानों पर दुकानें आंशिक रूप से खुली रहीं।

क्या है मांगे?

ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों का कहना है कि यह भारत बंद केंद्र सरकार की कथित श्रमिक-विरोधी, किसान-विरोधी और कॉर्पोरेट-समर्थक नीतियों के खिलाफ है। उनकी प्रमुख मांगों में नए श्रम कानूनों में किए गए बदलावों को वापस लेना, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी गारंटी देना, मनरेगा (MGNREGA) को मजबूत और पुनर्जीवित करना तथा सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाना शामिल है। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर ने दावा किया है कि इस बार हड़ताल में भागीदारी का स्तर पहले से अधिक है। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों, कृषि मजदूर यूनियनों, छात्र-युवा संगठनों और विभिन्न फेडरेशनों ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है। यूनियनों का दावा है कि यह आंदोलन 600 से अधिक जिलों में प्रभाव डाल रहा है, जबकि ओडिशा और असम जैसे राज्यों में बंद का व्यापक असर देखा जा रहा है।

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