बांग्लादेश में ऐतिहासिक मतदान आज, BNP या जमात किसकी बनेगी सरकार?

KNEWS DESK- बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद आज पहली बार संसदीय चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। यह चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि इसके साथ ही ‘जुलाई चार्टर’ पर भी जनमत संग्रह (रेफरेंडम) कराया जा रहा है। मतदाता आज दो वोट डालेंगे—एक संसद के लिए और दूसरा जुलाई चार्टर के समर्थन या विरोध में।

मतदान सुबह 7:30 बजे शुरू होकर शाम 4:30 बजे तक चलेगा। वोटिंग बैलेट पेपर के जरिए कराई जा रही है। संसदीय चुनाव के लिए सफेद बैलेट पेपर और जुलाई चार्टर रेफरेंडम के लिए रंगीन बैलेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना शुरू होगी और चुनाव परिणाम शुक्रवार को घोषित किए जाने की संभावना है।

बांग्लादेश की 300 सदस्यीय संसद में से 299 सीटों पर आज मतदान हो रहा है। शेरपुर-3 निर्वाचन क्षेत्र में एक उम्मीदवार के निधन के कारण वहां चुनाव स्थगित कर दिया गया है। इस सीट पर फिलहाल मतदान नहीं होगा।इस चुनाव में कुल 50 पंजीकृत और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल हिस्सा ले रहे हैं। 2,028 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। इन सभी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला आज मतदाता करेंगे।

अंतरिम यूनुस सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसी कारण अवामी लीग इस चुनाव में भाग नहीं ले रही है। यह पहली बार है जब देश में अवामी लीग के बिना संसदीय चुनाव हो रहा है, जिससे राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।

चुनाव आयोग ने मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। देशभर में सेना और बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।

हालांकि मतदान से पहले हिंसा की आशंका जताई गई है। अमेरिका ने भी चुनाव के दिन कट्टरपंथी तत्वों द्वारा हमले की चेतावनी दी है। इसके बावजूद विभिन्न देशों के चुनाव पर्यवेक्षक स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।

शेख हसीना के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए दो प्रमुख चेहरे सामने आए हैं।

पहले हैं तारिक रहमान, जो पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और पूर्व सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के प्रमुख हैं।दूसरे हैं शफीकुर रहमान, जो जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश के अमीर हैं। जमात-ए-इस्लामी ने 1971 की स्वतंत्रता संग्राम का विरोध किया था और उसे एक कट्टरपंथी इस्लामी संगठन माना जाता है।

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