उत्तराखंड: तीर्थाटन का सहारा, बढ़ता चुनावी पारा ! 

उत्तराखंड- आगामी साल 2027 उत्तराखंड सरकार और प्रशासन के लिए पहले से ही असाधारण रूप से व्यस्त रहने वाला साल है। इसी साल नंदा राजजात यात्रा भी आयोजित होनी है जिससे दबाव कई गुना बढ़ जाएगा क्योंकि इस साल हरिद्वार कुंभ मेला 2027 का आयोजन भी प्रस्तावित है क्योंकि कुंभ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि, विश्व का सबसे बड़ा मानव समागम भी माना जाता है हालांकि, इस बार हरिद्वार में अर्धकुंभ है, लेकिन सरकार इसे पूर्ण कुंभ की तरह ही बनाने की कोशिश में लगी है। तो वहीं इसके साथ ही सरकार और प्रशासनिक अमले के साथ बीजेपी संगठन के लिहाज से भी 2027 बेहद चुनौती भरा रहने वाला है क्योंकि, उत्तराखंड विधानसभा चुनाव भी इसी साल प्रस्तावित हैं। चुनावी साल में प्रशासनिक अमले का बड़ा हिस्सा चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत कार्य करता है। वहीं, दूसरी ओर चारधाम यात्रा भी प्रशासन और सरकार को बेहद व्यस्त रखने वाली है। चारधाम यात्रा उत्तराखंड के लिए हर साल एक बड़ा प्रशासनिक अभ्यास होती है। लाखों तीर्थयात्री, सीमित पर्वतीय सड़कें, मौसम की मार और आपदाओं का खतरा, इन सबके बीच प्रशासन को लगातार अलर्ट मोड में रहना पड़ता है। ऐसे में 2027 में यदि चारधाम यात्रा, कुंभ मेला और नंदा राजजात तीनों का दबाव एक साथ पड़ा तो प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना आसान नहीं होगा। यही वजह है कि उत्तराखंड में आगामी साल 2027 में होने वाले कुंभ मेला की तैयारियां जोरों-शोरों से चल रही है। ऐसे में कुंभ मेले की तैयारियां समय पर पूरी हो इसको लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय में संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री धामी द्वारा अधिकारियों को निर्देश दिए भी दिये गये है कि कुंभ मेले से संबंधित सभी तैयारियां 31 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाए। साथ ही कुंभ की आवश्यकताओं को देखते हुए सभी प्रकार के निर्माण कार्य भी तय समय के अंदर पूरे हों और निर्माण से संबंधित कामों की गुणवत्ता का भी विशेष ध्यान रखा जाए।

नंदा राजजात यात्रा उत्तराखंड की आत्मा से जुड़ा आयोजन है। इसे 2026 में कराना या 2027 में स्थगित करना। दोनों ही विकल्पों पर समिति को ही निर्णय लेना है। यदि यह यात्रा 2027 में होती है तो कुंभ मेला, विधानसभा चुनाव, चारधाम यात्रा और अन्य राष्ट्रीय आयोजनों के बीच सरकार व प्रशासन को असाधारण समन्वय संसाधन प्रबंधन एवं संवेदनशीलता दिखानी होगी। आने वाले समय में इस यात्रा को लेकर लिया जाने वाला निर्णय ये भी तय करेगा कि सरकार आस्था, परंपरा और प्रशासनिक क्षमता के बीच किस तरह संतुलन साधती है। इसको लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय में संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कुंभ मेले से संबंधित सभी तैयारियां 31 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाए। साथ ही कुंभ की आवश्यकताओं को देखते हुए सभी प्रकार के निर्माण काम भी तय समय के अंदर पूरे हों। यही नहीं निर्माण से संबंधित कामों की गुणवत्ता का भी विशेष ध्यान रखा जाए।

आपको बता दें कि हरिद्वार में अर्धकुंभ है लेकिन सरकार इसे पूर्ण कुंभ की तरह ही बनाने की कोशिश में लगी है। इसके साथ ही सरकार और प्रशासनिक अमले के साथ बीजेपी संगठन के लिहाज से भी 2027 बेहद चुनौती भरा रहने वाला है क्योंकि, उत्तराखंड विधानसभा चुनाव भी इसी साल प्रस्तावित हैं। चुनावी साल में प्रशासनिक अमले का बड़ा हिस्सा चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत कार्य करता है। वहीं, दूसरी ओर चारधाम यात्रा भी प्रशासन और सरकार को बेहद व्यस्त रखने वाली है। जिसके चलते विपक्षी दल सरकार पर चुनाव को तय समय पर करने की मांग अभी से करने लगे है। जो सरकार के लिए बेहद चुनौतियों भरा साल होने जा रहा है।

कुल मिला कर वर्ष 2027 आने वाले समय पर धामी सरकार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहेगा इसमें कोई दोहराय नहीं है। यही वजह है की धामी सरकार अभी से वक्त की नजाकत को देखते हुए अपनी तैयारियों को अमली जामा पहनाने में जुट गई है, साथ ही इसमें भी कोई दोहराय नहीं कि आने वाले वर्ष में देवभूमि में करोडों श्रद्धालुओं का जमवाड़ा लगने वाला है ऐसे में सरकार और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती करोडों श्रद्धालुओं की व्यवस्था पर है, ताकि देवभूमि में आये करोडों श्रद्धालु कोई गलत संदेश ना ले जाएं हालांकि वर्ष 2027 विधानसभा चुनाव को पूर्ण करना और भाजपा को विजय बनाना यह बात भी कही न कही सरकार की चिंता बढ़ाए है। अब ऐसे में देखना होगा क्या धामी सरकार यह सभी अग्निपरीक्षाएं पार करने में सफल हो पायेगी या विपक्ष सरकार की कमियों को जनता तक पहुंचाने में कामयाब होगा।

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