कल आएगा यूपी सरकार का बजट, इस साल 36 लाख करोड़ की होगी अर्थव्यवस्था

KNEWS DESK- उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था ने बीते आठ वर्षों में अभूतपूर्व विस्तार दर्ज किया है। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सोमवार को विधानमंडल के बजट सत्र के पहले दिन प्रदेश की पहली आर्थिक समीक्षा सदन के पटल पर रखी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016–17 में 13.30 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था आज बढ़कर 30.25 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुकी है, जबकि वित्तीय वर्ष 2025–26 में इसके 36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

वित्त मंत्री ने कहा कि इन आंकड़ों के साथ उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।

सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि जिस उत्तर प्रदेश को कभी निवेशकों की प्राथमिकता सूची में स्थान नहीं मिलता था, आज वही प्रदेश औद्योगिक निवेश का प्रमुख केंद्र बन गया है। ‘ट्रिपल एस’—सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड—की गारंटी के चलते राज्य को अब तक 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की तरह प्रदेश सरकार ने भी पहली बार आर्थिक समीक्षा प्रस्तुत कर विकास की दिशा और दशा को व्यवस्थित रूप से सामने रखा है।

आर्थिक समीक्षा के अनुसार, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश का योगदान वर्ष 2016–17 के 8.6 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2024–25 में 9.1 प्रतिशत हो गया है। स्वतंत्रता के बाद पहली बार प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय में गिरावट का सिलसिला पूरी तरह थमा है।

वर्ष 2016–17 में जहां प्रति व्यक्ति आय 54,564 रुपये थी, वहीं 2024–25 में यह बढ़कर 1,09,844 रुपये हो गई है। आगामी वित्तीय वर्ष में इसके 1,20,000 रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। राष्ट्रीय औसत के मुकाबले भी स्थिति में सुधार हुआ है—जो वर्ष 2014–15 में 50.2 प्रतिशत थी, वह अब 53.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

प्रदेश की अर्थव्यवस्था अब केवल कृषि पर निर्भर नहीं रही। वर्ष 2024–25 में जीएसडीपी में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की हिस्सेदारी 25.8 प्रतिशत, औद्योगिक क्षेत्र की 27.2 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र की 47 प्रतिशत रही। यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश बहु-क्षेत्रीय विकास के रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

प्रदेश का बजट आकार वर्ष 2016–17 में 3.47 लाख करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2025–26 में बढ़कर अनुमानित 8.33 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि 2008–09 से 2016–17 के आठ वर्षों में बजट में केवल 2.34 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई थी।

विकास को गति देने के लिए पूंजीगत व्यय में भी दो गुने से अधिक इजाफा हुआ है। वर्ष 2016–17 में 69.79 हजार करोड़ रुपये रहा पूंजीगत व्यय, 2024–25 में बढ़कर 147.72 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *