KNEWS DESK- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने पर देशभर में समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संघ की विचारधारा और दिशा पर विस्तार से प्रकाश डाला।
भागवत ने कहा कि संघ का प्रमुख किसी भी जाति का हो सकता है – ब्राह्मण, क्षत्रिय या अन्य कोई – लेकिन संघ प्रमुख हिंदू ही होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ में नियुक्ति कार्य या दायित्व के आधार पर होती है, न कि जाति या वर्ग के आधार पर। संघ का मूल उद्देश्य समाज को एक करना है और यह काम जीवनभर चलता रहता है।
भागवत ने भाषा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि संघ का अंग्रेज़ी से कोई बैर नहीं है, लेकिन संघ हमेशा मातृभाषा और हिंदी जैसी भारतीय भाषाओं का उपयोग प्राथमिकता देगा। अंग्रेज़ी का इस्तेमाल केवल तभी किया जाएगा जब यह आवश्यक हो।
उन्होंने संघ और राजनीतिक दलों के संबंध पर भी स्पष्ट किया। मोहन भागवत ने कहा कि RSS सरकार नहीं चलाता और संघ और BJP अलग-अलग संस्थाएं हैं। संघ का उद्देश्य केवल समाज को एक करना है, राजनीति से इसका कोई सीधा संबंध नहीं है।
भागवत ने यह भी कहा कि परिस्थितियों के आधार पर सोचने की बजाय, हमें यह देखना चाहिए कि परिस्थितियों में काम कैसे करना है। समाज में भाषा या अन्य आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए और समस्याओं का समाधान जल्दी से जल्दी किया जाना चाहिए। इसके लिए लोगों को एक-दूसरे के घर जाकर सहयोग करना चाहिए और मिल-जुलकर काम करना चाहिए।
इस कार्यक्रम में मोहन भागवत ने संघ के 100 सालों की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर भी प्रकाश डाला और सभी स्वयंसेवकों को प्रेरित किया कि वे समाज के एकीकरण और सेवा के कार्य में लगातार सक्रिय रहें।