KNEWS DESK- महाशिवरात्रि का व्रत केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि, संयम और भगवान शिव की गहन भक्ति का मार्ग माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धा, सही नियम और संतुलित आहार के साथ किया गया व्रत साधक को मानसिक शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है।
महाशिवरात्रि 2026: तिथि और शुभ समय
पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी 2026 को शाम 05:04 बजे से प्रारंभ होगी
और 16 फरवरी 2026 को शाम 05:34 बजे तक रहेगी। महाशिवरात्रि का व्रत कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें शारीरिक संयम के साथ-साथ मानसिक एकाग्रता और जागरण का विशेष महत्व होता है।
व्रत के दौरान क्या खाएं?
महाशिवरात्रि व्रत में शरीर को ऊर्जावान बनाए रखना बेहद आवश्यक है। इस दौरान पानी की कमी न होने दें।
व्रत में लाभकारी आहार:
- ताजे फलों का रस
- नारियल पानी और नींबू पानी
- केला, सेब और बेर जैसे फल
- कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें
- साबूदाने की खिचड़ी
- उबले या हल्के तेल में बने आलू
हल्का और सुपाच्य भोजन करने से पूजा और ध्यान में मन लगा रहता है।
महाशिवरात्रि पर किन चीजों से बनाएं दूरी
व्रत के दौरान शुद्धता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
इन चीजों का सेवन न करें:
- गेहूं, चावल और दालें
- साधारण नमक (केवल सेंधा नमक का प्रयोग करें)
- प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा
- तला-भुना और भारी भोजन
- डिब्बाबंद या बाजार के जूस
इनसे आलस्य बढ़ता है और साधना में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
दूध और ड्राई फ्रूट्स का आध्यात्मिक और स्वास्थ्य लाभ
भगवान शिव को दूध अत्यंत प्रिय है, इसलिए व्रत में दूध से बनी चीजों का सेवन श्रेष्ठ माना जाता है।
व्रत में शामिल करें:
- दूध, दही और पनीर
- मखाने की खीर
- बादाम, काजू और अखरोट
ड्राई फ्रूट्स शरीर को ऊर्जा देते हैं और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देते। ध्यान रखें कि अत्यधिक मीठे पदार्थों से बचें।
पारण का सही समय और सेहत का ध्यान
महाशिवरात्रि व्रत का पारण 16 फरवरी 2026 को सुबह 06:59 बजे के बाद शुभ माना गया है।
पारण के समय:
- भारी भोजन से बचें
- पहले पानी या हल्का फलाहार लें
- बाद में सात्विक भोजन ग्रहण करें
यदि किसी को स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो, तो व्रत में लचीलापन रखें। महादेव भावना के भूखे हैं, कठोरता के नहीं।
महाशिवरात्रि व्रत का महत्व
सही नियम, संतुलित आहार और श्रद्धा के साथ किया गया महाशिवरात्रि व्रत जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह व्रत न केवल शरीर को शुद्ध करता है, बल्कि मन और आत्मा को भी महादेव से जोड़ता है।