मंत्री का काफिला रोकने पर घिरे BJP विधायक, नोटिस के बाद पिता ने मांगी माफी, सीएम योगी का काफिला रोकने की कही थी बात

डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश की चरखारी विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक बृजभूषण राजपूत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला रोकने और बाद में मुख्यमंत्री को लेकर दिए गए विवादित बयान के बाद अब पार्टी स्तर पर कार्रवाई की आशंका गहराती दिख रही है। बीजेपी की ओर से विधायक को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा गया है। नोटिस के बाद अब विधायक के पिता और पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत की सफाई सामने आई है। उन्होंने बेटे के बयान पर यू-टर्न लेते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। गंगाचरण राजपूत ने कहा कि “कई बार व्यक्ति कुछ कहना चाहता है, लेकिन निकल कुछ और जाता है। अगर किसी के शब्दों से पार्टी को ठेस पहुंची है तो हम माफी मांगते हैं।”

छोटा हो या बड़ा… सजा सबको बराबर मिलेगी

उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी एक अनुशासित पार्टी है, जहां बड़े-बड़े नेताओं को भी अनुशासनहीनता पर पद छोड़ना पड़ा है। अपराध छोटा हो या बड़ा, सजा सबके लिए बराबर होती है। उन्होंने यह भी इशारों में कहा कि मंत्री से भी चूक हुई है और पार्टी संविधान का पालन सभी को करना चाहिए। इस बीच, बृजभूषण राजपूत के पार्टी छोड़ने की अटकलों को खारिज करते हुए गंगाचरण राजपूत ने साफ कहा कि उनका बेटा बीजेपी के लिए जीता है और बीजेपी में ही रहेगा। बुंदेली कहावत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि “गलती हुई है तो मूड़ धर के पांव पड़ना पड़ता है,” यानी माफी मांगनी पड़ती है।

30 जनवरी को स्वतंत्र देव सिंह को बनाया था बंधक

दरअसल, 30 जनवरी को विधायक बृजभूषण राजपूत ने करीब 100 से ज्यादा ग्राम प्रधानों के साथ मिलकर जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला रोकते हुए बंधक बना दिया था। विधायक का कहना था कि क्षेत्र में खराब सड़कें और पेयजल संकट गंभीर है, लेकिन सरकार उनकी सुनवाई नहीं कर रही। इसके बाद उनका एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने यहां तक कह दिया कि जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री का काफिला भी रोक देंगे। इस बयान ने पार्टी नेतृत्व को असहज कर दिया, जिसके बाद बीजेपी ने सख्त रुख अपनाते हुए नोटिस जारी किया। फिलहाल विधायक बृजभूषण राजपूत की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वे भी अपने पिता की तरह सार्वजनिक रूप से माफी मांगेंगे या फिर अपने तेवर पर अड़े रहेंगे।

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