शिव शंकर सविता- उत्तर प्रदेश के कानपुर के रावतपुर इलाके से इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक पिता ने अपनी ही एक साल की मासूम बेटी की जिंदगी छीन ली। आरोप है कि बच्ची के पिता गोपाल को अपनी पत्नी के चरित्र पर शक था और वह लगातार बच्ची का डीएनए टेस्ट कराने की बात करता था। इसी शक और पारिवारिक कलह ने आखिरकार एक नन्ही जान को मौत के मुंह में धकेल दिया। मृतका की मां रुचि के अनुसार, उसने और गोपाल ने सितंबर 2024 में प्रेम प्रसंग के बाद कोर्ट मैरिज की थी। शादी के महज तीन महीने बाद ही बेटी का जन्म हुआ, जिसे लेकर गोपाल को लगातार संदेह रहता था। रुचि का कहना है कि पति उसे आए दिन “बदचलन” कहकर अपमानित करता था और बच्ची को अपना मानने से इनकार करता था। घर के खर्च या दूध के लिए पैसे मांगने पर वह शराब के नशे में मारपीट करता था।
एक महीने बाद बच्ची ने तोड़ा दम
रुचि ने आरोप लगाया कि करीब एक महीने पहले गोपाल ने विवाद के दौरान बच्ची को ठंडे पानी से भरे टब में फेंक दिया और उसे डुबाने की कोशिश की। उस समय तो किसी तरह मासूम की जान बचा ली गई, लेकिन इसके बाद उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। परिजन उसे अस्पताल ले गए, जहां बच्ची का इलाज चलता रहा। एक महीने तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद शुक्रवार सुबह मासूम ने दम तोड़ दिया। बच्ची की मौत की खबर मिलते ही मायके वालों का गुस्सा फूट पड़ा। गम और आक्रोश से भरे परिजनों ने मासूम का शव ससुराल के दरवाजे पर रखकर हंगामा किया और न्याय की मांग करने लगे। सूचना मिलने पर रावतपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद साफ होगी स्थिति
रावतपुर थाना प्रभारी कमलेश राय ने बताया कि परिजनों की तहरीर के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारणों की पुष्टि होगी, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह घटना न केवल एक परिवार की बर्बादी की कहानी है, बल्कि समाज के उस काले चेहरे को भी उजागर करती है, जहां शक, शराब और घरेलू हिंसा मिलकर एक मासूम की जान ले लेते हैं। सवाल यही है कि जिस बच्ची ने अभी दुनिया देखनी भी शुरू नहीं की थी, उसकी जिंदगी का फैसला उसके अपने पिता ने कैसे कर दिया?