शिव शंकर सविता- जौनपुर जिले के पूरनपुर गांव में रेलवे विभाग की लापरवाही अब ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाले रास्ते पर बिना किसी पूर्व सूचना, वैकल्पिक व्यवस्था या ग्रामीणों से समन्वय के रेलवे द्वारा लोहे का भारी गार्टर लगा दिया गया है। इसके चलते पूरनपुर गांव सहित आसपास के करीब 10 से 12 गांवों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो गया है और ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता वर्षों से उनके लिए जीवनरेखा की तरह है। इसी मार्ग से किसान अपने खेतों तक जाते हैं, बच्चे स्कूल पहुंचते हैं और बीमार लोगों को अस्पताल ले जाया जाता है। लेकिन अब गार्टर लगने के बाद बड़े वाहन तो दूर, कई बार दोपहिया और पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है। खासकर रात के समय और बरसात में हालात और खराब हो जाते हैं।

15 वर्षों से ग्रामीण कर रहे हैं अंडरपास की मांग
स्थानीय लोगों ने बताया कि वे पिछले करीब 15 वर्षों से रेलवे प्रशासन से अंडरपास निर्माण की मांग कर रहे थे। कई बार ज्ञापन दिए गए, अधिकारियों से मुलाकात की गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी मांगों को नजरअंदाज करते हुए रेलवे ने मनमाने तरीके से गार्टर लगा दिया, जिससे समस्या का समाधान होने के बजाय और बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि खेतों तक ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरण नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे खेती-किसानी पर सीधा असर पड़ रहा है। फसल की ढुलाई में दिक्कत हो रही है और लागत भी बढ़ गई है। वहीं, ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि किसी आपात स्थिति, जैसे गर्भवती महिला, गंभीर रूप से बीमार मरीज या दुर्घटना के समय इस अवरोध के कारण जान-माल का नुकसान भी हो सकता है।

किसान नेता ने वीडियो के माध्यम से उठाई मांग
इस पूरे मामले को किसान नेता अजीत सिंह डोभी ने वीडियो के जरिए सामने लाते हुए रेलवे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे को विकास कार्य करने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बिना योजना और बिना वैकल्पिक रास्ता दिए इस तरह मुख्य मार्ग को बंद कर देना पूरी तरह गलत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही अंडरपास का निर्माण नहीं कराया गया और रास्ता सुचारू नहीं हुआ, तो ग्रामीण आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए के न्यूज़ की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची और ग्रामीणों से बातचीत की। ग्रामीणों ने कैमरे के सामने अपनी पीड़ा खुलकर रखी और बताया कि किस तरह रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। लोगों का कहना है कि वे सिर्फ सुरक्षित और स्थायी समाधान चाहते हैं, ताकि आने वाले समय में ऐसी परेशानी दोबारा न झेलनी पड़े।