डिजिटल डेस्क- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राज्यसभा में व्यापक और आक्रामक संबोधन दिया। जैसे ही पीएम ने बोलना शुरू किया, विपक्षी दलों ने नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया। इस पर प्रधानमंत्री ने सभापति से कहा कि खरगे जी को सीट पर बैठकर ही बोलने और नारे लगाने की अनुमति दे दी जाए। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार ने समाज के हर वर्ग के लिए काम किया है और अब देश एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां रुकना या पीछे मुड़कर देखना विकल्प नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का पहला क्वार्टर पूरा हो चुका है और दूसरा क्वार्टर भारत के भविष्य के लिए बेहद अहम साबित होने वाला है। विकसित भारत के निर्माण की दिशा में यह दौर तेज गति से आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि देश का हर नागरिक यह महसूस कर रहा है कि भारत एक ऐतिहासिक पड़ाव पर पहुंच चुका है और अब लक्ष्य हासिल करके ही सांस लेनी है।
भारत के वर्तमान हालात सुयोगों का संगम- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने भारत के वर्तमान हालात को “सुयोगों का संगम” बताया। उन्होंने कहा कि जहां दुनिया के कई बड़े देश बुजुर्ग आबादी की समस्या से जूझ रहे हैं, वहीं भारत युवा आबादी वाला देश बनकर उभर रहा है। आज भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा युवा टैलेंट है, जिसमें सपने भी हैं और सामर्थ्य भी। वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की ग्रोथ हाई है और महंगाई नियंत्रण में है, जिससे अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की ओर बढ़ रही है और भारत इस बदलाव का अहम हिस्सा बन चुका है। आज भारत कई देशों का भरोसेमंद साझेदार है और ‘ग्लोबल साउथ’ की बुलंद आवाज के रूप में उभरा है। उन्होंने बताया कि भारत ने अब तक दुनिया के 9 बड़े देशों के साथ ट्रेड डील की हैं, जबकि 27 देशों के साथ एक बड़ी ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ भी की गई है। विपक्ष पर तंज कसते हुए पीएम ने कहा कि जो लोग थककर चले गए, उन्हें जवाब देना होगा कि उनके समय में कोई देश भारत से डील क्यों नहीं करना चाहता था।
कांग्रेस के शासनकाल में स्पष्ट विजन
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनके शासनकाल में कोई स्पष्ट विजन नहीं था। लाल किले से दिए गए पुराने भाषणों को देखने पर यह साफ हो जाता है। आज सरकार की बड़ी ताकत कांग्रेस की गलतियों को सुधारने में लग रही है। उन्होंने कहा कि भारत अब ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर सवार है और देश पॉलिसी के आधार पर आगे बढ़ रहा है। दुनिया आज भारतीय उद्यमियों को बराबरी की नजर से देखती है। एमएसएमई सेक्टर पर बात करते हुए पीएम ने कहा कि मजबूत एमएसएमई नेटवर्क देश को ताकत देता है। सरकार ने इस क्षेत्र के लिए बड़े सुधार किए हैं, जिसका नतीजा है कि आज दुनिया का भारत पर भरोसा बढ़ा है। ईयू और अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर उन्होंने कहा कि इन समझौतों से वैश्विक स्थिरता को बल मिला है और पूरी दुनिया भारत के प्रयासों की तारीफ कर रही है।
विपक्षी दल अपनाते हैं दोहरा मापदंड
प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग आर्थिक असमानता की बात करते हैं, लेकिन अपने शासनकाल की नीतियों पर नजर नहीं डालते। अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर पीएम ने कहा कि दुनिया के हर देश अवैध नागरिकों को बाहर निकाल रहा है, लेकिन विपक्ष यहां घुसपैठियों की वकालत कर रहा है, जो देश के युवाओं और आदिवासियों के अधिकार छीन रहे हैं। बैंकिंग सेक्टर पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 2014 से पहले ‘फोन बैंकिंग’ का दौर था, जहां नेताओं के फोन पर करोड़ों रुपये बांट दिए जाते थे और गरीबों को नजरअंदाज किया जाता था। कांग्रेस शासन में एनपीए का पहाड़ खड़ा हो गया था। सत्ता में आने के बाद सरकार ने साहसिक फैसले लेते हुए बैंकिंग सुधार किए, कमजोर बैंकों का मर्जर किया और एनपीए को काफी हद तक नियंत्रित किया।
अबतक 30 लाख से ज्यादा का दिया गया लोन
मुद्रा योजना का जिक्र करते हुए पीएम ने बताया कि इसके तहत अब तक 30 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का लोन दिया गया है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं। इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि पीएसयू को लेकर फैलाई गई नकारात्मक धारणा को सरकार ने बदला है और आज एलआईसी, एसबीआई और एचएएल जैसे संस्थान रिकॉर्ड मुनाफे में हैं। किसानों के मुद्दे पर पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने छोटे किसानों की कभी चिंता नहीं की। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत अब तक 4 लाख करोड़ रुपये किसानों के खातों में पहुंचाए जा चुके हैं। इससे किसानों को नए सपने देखने का अवसर मिला है। अंत में पीएम ने योजना आयोग का उदाहरण देते हुए कांग्रेस की पुरानी कार्यशैली पर सवाल उठाए और कहा कि 2014 के बाद नीति आयोग बनाकर देश को नई दिशा दी गई।