KNEWS DESK- भगवान शिव को हिंदू धर्मशास्त्रों में संहारक कहा गया है और उन्हें देवों के देव महादेव का स्थान प्राप्त है। शास्त्रों और पुराणों में भगवान शिव को समर्पित अनेक व्रत और पर्वों का उल्लेख मिलता है, जिनमें प्रदोष व्रत, शिव चतुर्दशी, मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि प्रमुख हैं। इन सभी में महाशिवरात्रि को भगवान शिव का सबसे बड़ा और महत्त्वपूर्ण पर्व माना जाता है।
महाशिवरात्रि कब और क्यों मनाई जाती है?
महाशिवरात्रि फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है और यह पर्व साल में केवल एक बार आता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि पर भगवान शिव पहली बार लिंग रूप में प्रकट हुए थे और उन्होंने इसी रूप में भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी की परीक्षा ली थी। तभी से यह तिथि महाशिवरात्रि के रूप में प्रसिद्ध हो गई।इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी।
महाशिवरात्रि से जुड़ी प्रमुख मान्यताएं
एक मान्यता यह भी है कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को हुआ था, इसी कारण महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। हालांकि शिव पुराण में इस कथा का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता। कुछ विद्वानों का यह भी मत है कि इसी दिन भगवान शिव 12 ज्योतिर्लिंगों के रूप में प्रकट हुए थे।
मासिक शिवरात्रि क्या है?
महाशिवरात्रि के अलावा हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि मनाई जाती है, जिसे मासिक शिवरात्रि कहा जाता है। यह व्रत शिव चतुर्दशी के नाम से भी प्रसिद्ध है। चूंकि यह हर महीने आती है, इसलिए साल भर में 12 मासिक शिवरात्रि पड़ती हैं।
महाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि में मुख्य अंतर
- महाशिवरात्रि साल में केवल एक बार आती है।
- मासिक शिवरात्रि साल में 12 बार मनाई जाती है।
- महाशिवरात्रि का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अधिक माना जाता है।
- दोनों व्रत भगवान शिव को समर्पित होते हैं, लेकिन महाशिवरात्रि को विशेष फलदायी माना जाता है।
महाशिवरात्रि पर रात्रि में ही क्यों होती है पूजा?
महाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि दोनों में भगवान शिव की पूजा रात्रि काल में की जाती है। मान्यता है कि भगवान शिव का लिंग रूप में अवतरण रात्रि में ही हुआ था। इसी कारण इन व्रतों में रात के चारों प्रहर में शिव पूजन का विधान बताया गया है।
अगले दिन विधिपूर्वक व्रत का पारण किया जाता है।