बंगाल चुनाव से पहले बड़ा फैसला, विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी कांग्रेस, TMC से दूरी तय

डिजिटल डेस्क- पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा सियासी संकेत सामने आया है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। कांग्रेस के प्रभारी महासचिव गुलाम अहमद मीर ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई अहम बैठक में यह फैसला लिया गया। गुलाम अहमद मीर के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व ने बंगाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और जमीनी हालात का आकलन करने के बाद यह निर्णय किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी और संगठन को मजबूत करने पर फोकस रहेगा।

ममता बनर्जी पहले ही कर चुकी हैं ऐलान

कांग्रेस के इस फैसले से पहले तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी यह साफ कर चुकी हैं कि उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव अकेले ही लड़ेगी। ममता बनर्जी ने कहा था, “तृणमूल कांग्रेस बंगाल में अकेले चुनाव लड़ती है। सभी पार्टियां तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ लड़ती हैं। उन्हें लड़ने दो। सबकी अपनी-अपनी सोच होती है।” ममता के इस बयान के बाद यह लगभग तय माना जा रहा था कि कांग्रेस और TMC के बीच किसी तरह का गठबंधन नहीं होगा। अब कांग्रेस की ओर से अकेले चुनाव लड़ने के ऐलान ने इन अटकलों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है।

लेफ्ट के साथ भी गठबंधन पर सस्पेंस

बंगाल की राजनीति में कांग्रेस का लेफ्ट फ्रंट के साथ गठबंधन का इतिहास रहा है। 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने लेफ्ट के साथ सीट शेयरिंग समझौता किया था। हालांकि इस बार कांग्रेस ने अब तक लेफ्ट के साथ किसी गठबंधन में रुचि नहीं दिखाई है। इसी वजह से यह सवाल उठ रहा था कि क्या कांग्रेस 2011 की तरह तृणमूल कांग्रेस के साथ हाथ मिलाएगी, लेकिन मौजूदा फैसले ने साफ कर दिया है कि पार्टी इस बार अलग राह पर चलेगी।

अधीर रंजन चौधरी ने जताया समर्थन

कांग्रेस के इस फैसले पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि पार्टी आलाकमान ने जो फैसला लिया है, वह उसके साथ हैं। उन्होंने संकेत दिया कि संगठनात्मक मजबूती और वैचारिक स्पष्टता के साथ चुनाव लड़ना ही इस बार कांग्रेस की रणनीति होगी।

बंगाल में कांग्रेस का पिछला प्रदर्शन

अगर पिछले चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो कांग्रेस का बंगाल में प्रदर्शन लगातार कमजोर रहा है।

  • 2016 विधानसभा चुनाव: कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन के तहत कांग्रेस ने 44 सीटें जीतीं, CPI(M) को 26 सीटें मिलीं।
  • 2021 विधानसभा चुनाव: कांग्रेस और लेफ्ट, दोनों को एक भी सीट नहीं मिली।
  • 2024 लोकसभा चुनाव: कांग्रेस सिर्फ एक सीट जीत सकी, जबकि लेफ्ट का खाता भी नहीं खुला।
  • 2019 लोकसभा चुनाव: कांग्रेस ने दो सीटें जीतीं, लेफ्ट को कोई सफलता नहीं मिली।

माकपा का बयान

CPI(M) ने कांग्रेस का नाम लिए बिना बयान जारी करते हुए कहा कि पार्टी बंगाल में TMC और BJP दोनों को हराने के लिए काम करेगी। माकपा ने कहा कि समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ सभी लोकतांत्रिक शक्तियों को एकजुट करने की कोशिश जारी रहेगी।अल्पसंख्यक वोट बैंक बना अहम फैक्टर बंगाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि ममता बनर्जी राष्ट्रीय स्तर पर भले ही बीजेपी के खिलाफ मुखर हों, लेकिन राज्य में कांग्रेस और माकपा को सबसे ज्यादा नुकसान तृणमूल कांग्रेस से ही हुआ है। कांग्रेस और लेफ्ट दोनों का एक बड़ा वोट बैंक अल्पसंख्यक समुदाय रहा है, और आरोप है कि ममता बनर्जी इस वोट बैंक में किसी भी तरह का बंटवारा नहीं चाहतीं।

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