KNEWS DESK – केंद्र सरकार ने सोमवार (2 फरवरी) को सुप्रीम कोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में लेने का बचाव किया। सरकार का दावा है कि वांगचुक के सार्वजनिक भाषण युवाओं को उकसाने वाले, अलगाववादी संदेश देने वाले और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले थे, विशेषकर संवेदनशील सीमा क्षेत्र लद्दाख में।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में बताया कि वांगचुक लद्दाख को नेपाल या बांग्लादेश जैसी स्थिति की ओर धकेलने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वांगचुक ने युवाओं को इस दिशा में उकसाने के लिए अपने भाषणों में हिंसक विद्रोह और राजनीतिक अस्थिरता वाले उदाहरणों का इस्तेमाल किया।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना वराले शामिल थे, वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में वांगचुक की हिरासत को चुनौती दी गई थी।
सरकार का तर्क
सरकार ने कोर्ट को बताया कि वांगचुक के भाषण राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। तुषार मेहता ने कहा कि जनमत संग्रह और रेफरेंडम की मांग करके युवाओं को भड़काना कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है।
सॉलिसिटर जनरल ने आगे कहा कि जिला मजिस्ट्रेट ने निष्कर्ष निकाला कि वांगचुक के भाषण युवाओं को भड़काने वाले हैं और सार्वजनिक शांति को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हिरासत का आदेश उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए पारित किया गया और चार घंटे के भीतर कार्रवाई की गई।
आरोपों का विवरण
तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि वांगचुक ने लद्दाख को नेपाल, बांग्लादेश या श्रीलंका जैसी स्थिति में ले जाने की योजना बनाई थी। उन्होंने अपने भाषणों में महात्मा गांधी का नाम केवल आवरण के रूप में इस्तेमाल किया और केंद्र सरकार को “वे” कहकर विभाजन की भावना फैलाई।
गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग के लिए हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद हुई थी। इन प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हुई और 90 लोग घायल हुए थे। वर्तमान में वांगचुक जोधपुर स्थित सेंट्रल जेल में बंद हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई मंगलवार को भी जारी रहेगी, जिसमें वांगचुक की NSA हिरासत की वैधता पर बहस होगी।