शिव शंकर सविता- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संवेदनशील पहल ने कानपुर की मूकबाधिर बच्ची खुशी की जिंदगी में नई रोशनी भर दी है। जो बच्ची न सुन सकती थी, न बोल सकती थी, आज वह न केवल सुन और बोल पा रही है, बल्कि उसके चेहरे पर आत्मविश्वास की मुस्कान भी लौट आई है। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से खुशी का इलाज संभव हुआ और अब उसके परिवार को आवास भी उपलब्ध कराया जाएगा। यह कहानी है उस मासूम हौसले की, जिसने तमाम मुश्किलों के बावजूद हार नहीं मानी। कुछ हफ्ते पहले खुशी अकेले कानपुर से लखनऊ मुख्यमंत्री से मिलने के लिए निकल पड़ी। उसकी उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री उसकी मदद जरूर करेंगे। लेकिन लखनऊ पहुंचने के बाद सीएम से मिलने के तमाम प्रयास विफल हो गए। दिन ढल गया, रात हो गई और थक-हारकर बच्ची हजरतगंज चौराहे पर बैठकर रोने लगी।
उच्चाधिकारियों ने मिलवाया सीएम योगी से
इसी दौरान गश्त पर निकले हजरतगंज थाना प्रभारी विक्रम सिंह की नजर रोती हुई बच्ची पर पड़ी। उन्होंने बच्ची से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन तब पता चला कि खुशी मूकबाधिर है और न बोल सकती है, न सुन सकती है। इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने पूरी संवेदनशीलता के साथ बच्ची की बात समझने की कोशिश की और उसकी परेशानी जानी। मामले की गंभीरता को समझते हुए इंस्पेक्टर ने तुरंत उच्च अधिकारियों को जानकारी दी और बच्ची को मुख्यमंत्री से मिलवाने का निर्णय लिया। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी खुशी को मिलने के लिए बुलाया। मुख्यमंत्री ने बच्ची की आपबीती सुनी और तत्काल उसके इलाज के निर्देश दिए।
सीएम योगी के निर्देश के बाद शुरू हुआ इलाज
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद खुशी का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और आवश्यक इलाज शुरू हुआ। इलाज के सकारात्मक परिणाम सामने आए और अब खुशी सुन और बोल सकती है। यह बदलाव न सिर्फ खुशी के लिए बल्कि उसके पूरे परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। खुशी के परिवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री का सहयोग न मिलता, तो शायद उनकी बेटी का भविष्य अंधेरे में ही रहता। परिवार का कहना है कि मुख्यमंत्री ने न सिर्फ इलाज कराया, बल्कि जल्द ही उन्हें आवास भी उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है।