शिव शंकर सविता- लोकसभा में सोमवार को उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के नाम का हवाला देते हुए चीन और डोकलाम से जुड़ा दावा किया। राहुल गांधी ने कहा कि डोकलाम में चीनी सेना के टैंक भारतीय सीमा के पास मौजूद हैं, और उन्होंने यह दावा एक पुस्तक के संदर्भ के आधार पर करने की बात कही। राहुल गांधी के इस बयान पर सत्ता पक्ष ने कड़ा ऐतराज जताया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तुरंत खड़े हो गए और राहुल गांधी को सीधी चुनौती दे दी। राजनाथ सिंह ने कहा कि जिस पुस्तक का हवाला देकर यह दावा किया जा रहा है, वह पुस्तक अभी तक प्रकाशित ही नहीं हुई है। ऐसे में उसके आधार पर सदन में गंभीर और संवेदनशील विषय पर बयान देना पूरी तरह अनुचित है।
रक्षामंत्री ने दी राहुल गांधी को चुनौती
रक्षा मंत्री ने कहा, “मैं राहुल गांधी को चुनौती देता हूं कि वह बताएं कि यह पुस्तक प्रकाशित हुई है या नहीं। जो किताब छपी ही नहीं, उसके आधार पर सदन में इस तरह के दावे नहीं किए जा सकते। यह सदन की गरिमा के खिलाफ है।” इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह ने भी आपत्ति जताई। उन्होंने कांग्रेस की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या के उदाहरण से इस मामले की तुलना नहीं की जा सकती। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि तेजस्वी सूर्या ने अपनी स्पीच में 2004 से 2014 तक के राष्ट्रपति अभिभाषणों का हवाला दिया था, न कि किसी अप्रकाशित पुस्तक या बाहरी संदर्भ का। इस बीच राहुल गांधी ने अपना रुख आक्रामक बनाए रखा।
ये लोग आतंकवाद से लड़ने की बात करते हैं पर एक कोट के जिक्र से डरते हैं- राहुल गांधी
उन्होंने कहा कि वे पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे के संस्मरणों का हवाला दे रहे हैं, भले ही वे अभी प्रकाशित न हुए हों। राहुल गांधी ने तंज कसते हुए कहा, “ये लोग आतंकवाद से लड़ने की बात करते हैं, लेकिन एक कोट का जिक्र करने से डरते हैं। आखिर इसमें ऐसा क्या लिखा है कि सरकार उसका जिक्र तक नहीं करने देना चाहती?” राहुल गांधी की बात पर हंगामा और बढ़ गया। इसी दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी खड़े हो गए और राहुल गांधी का समर्थन करते हुए कहा कि चीन का मुद्दा संवेदनशील जरूर है, लेकिन उस पर चर्चा से भागा नहीं जा सकता। अखिलेश यादव ने कहा कि डॉ. राम मनोहर लोहिया और मुलायम सिंह यादव भी चीन को लेकर हमेशा सतर्क रहने की बात करते थे, ऐसे में नेता विपक्ष को बोलने से रोका नहीं जाना चाहिए।
सदन में पुस्तक के जिक्र करने पर जताई आपत्ति
हालांकि, राजनाथ सिंह ने दोहराया कि यदि किसी पुस्तक के प्रकाशन पर ही रोक है या वह सामने नहीं आई है, तो उसका जिक्र सदन में नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसे गलत परंपरा और सदन की मर्यादा के खिलाफ बताया। लगातार हो रहे हंगामे के बीच राहुल गांधी बार-बार उसी मुद्दे पर बोलने की कोशिश करते रहे, लेकिन सत्ता पक्ष के विरोध के चलते कार्यवाही बाधित होती रही। अंत में राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से कहा कि वे ही बता दें कि उन्हें क्या कहना चाहिए।