डिजिटल डेस्क- शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश को लेकर इस वर्ष बड़े और सख्त बदलाव किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार अब किराए के मकान में रहने वाले अभिभावकों के बच्चों को RTE के तहत प्रवेश नहीं मिलेगा। इसके लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि जिस घर में बच्चा रह रहा है, उसका रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकरण होना चाहिए। बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि इस बदलाव का मकसद RTE के तहत होने वाले दाखिलों में फर्जी पते और अपात्र आवेदनों पर रोक लगाना है। विभाग को पिछले कुछ वर्षों में शिकायतें मिल रही थीं कि किराए के पते दिखाकर या अस्थायी निवास के आधार पर दाखिले लिए जा रहे हैं।
यूनिफॉर्म का पैसा अब सीधे अभिभावकों के खाते में
RTE नियमों में एक और अहम बदलाव किया गया है। अब बच्चों की यूनिफॉर्म की धनराशि सीधे अभिभावकों के बैंक खाते में भेजी जाएगी। पहले यह प्रक्रिया जिला या स्कूल स्तर पर होती थी, लेकिन अब इसे निदेशालय स्तर से संचालित किया जाएगा।
इसके लिए आधार कार्ड से बैंक खाते का सत्यापन अनिवार्य किया गया है। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और पैसे के दुरुपयोग की आशंका खत्म होगी। राजधानी में संचालित 1576 निजी स्कूलों में RTE के तहत करीब 21,000 सीटों पर प्रवेश के लिए 2 फरवरी से ऑनलाइन आवेदन शुरू होंगे। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में ज्यादा है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार के अनुसार, पिछले साल 1398 निजी स्कूलों में करीब 18,000 सीटों पर आवेदन हुए थे, जबकि इस बार स्कूलों और सीटों दोनों में बढ़ोतरी हुई है।
दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच व्यवस्था
RTE के तहत प्रवेश लेने वाले सभी बच्चों के दस्तावेजों की ऑनलाइन कॉपी विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। संबंधित निजी स्कूलों के प्रबंधक और प्रधानाचार्य को यूजर आईडी दी जाएगी, जिससे वे बच्चों के दस्तावेज ऑनलाइन ही सत्यापित कर सकेंगे। इस व्यवस्था से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के दाखिले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
फीस का भुगतान सरकार करेगी
RTE के तहत जिन बच्चों का चयन होगा, उनकी पूरी फीस सरकार द्वारा संबंधित स्कूलों को दी जाएगी। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों से जरूरी डाटा मांगा है, ताकि भुगतान प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके। कुल मिलाकर, RTE नियमों में किए गए ये बदलाव यह साफ करते हैं कि सरकार अब इस योजना को और ज्यादा पारदर्शी, तकनीक-आधारित और सख्त निगरानी के साथ लागू करना चाहती है।