डिजिटल डेस्क- केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में वित्त वर्ष 2026–27 का आम बजट पेश कर दिया है। यह उनका लगातार नौवां बजट रहा, जिसका भाषण करीब 85 मिनट चला। बजट के तुरंत बाद शेयर बाजार और कीमती धातुओं की कीमतों में हलचल देखने को मिली, लेकिन राजनीतिक प्रतिक्रिया भी उतनी ही तेज रही। बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस बार इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे उन करदाताओं को निराशा हाथ लगी, जो टैक्स में राहत की उम्मीद लगाए बैठे थे। सीतारमण ने बताया कि राजकोषीय घाटा 2026-27 में जीडीपी का 4.3% रहने का अनुमान है, जो सरकार की वित्तीय अनुशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में शामिल होने की दिशा में बढ़ रहा है देश- वित्तमंत्री
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास के लाभ किसानों, आदिवासियों, महिलाओं और युवाओं तक पहुंचें। साथ ही, उन्होंने दोहराया कि सरकार ‘विकसित भारत’ के विजन को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वैश्विक बाजार के साथ लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी के तहत आगे बढ़ेगी।
बातों के मुकाबले कमजोर बजट- कांग्रेस
हालांकि कांग्रेस ने बजट को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि बजट 2026-27 को लेकर जो बड़ी-बड़ी बातें कही जा रही थीं, उनके मुकाबले यह बजट काफी कमजोर साबित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट भाषण में कई अहम योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए आवंटन को लेकर स्पष्टता की कमी रही। कांग्रेस का कहना है कि महंगाई, बेरोजगारी और मध्यम वर्ग की समस्याओं पर बजट में ठोस समाधान नहीं दिखता। विपक्ष ने इसे जनता की उम्मीदों पर खरा न उतरने वाला बजट बताया है।