शिव शंकर सविता- केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026–27 का बजट पेश करते हुए कस्टम ड्यूटी से जुड़े कई बड़े ऐलान किए। उन्होंने कहा कि सरकार कस्टम ड्यूटी स्ट्रक्चर को सरल और व्यापार-अनुकूल बनाने के लिए कदम उठा रही है, जिससे निर्यातक और उद्योगपतियों को नई सुविधा मिलेगी। बजट भाषण के अनुसार, समुद्री खाद्य पदार्थों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रोसेसिंग में इस्तेमाल होने वाले चुनिंदा इनपुट्स के ड्यूटी-फ्री आयात की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। वर्तमान में यह सीमा निर्यात टर्नओवर के 1% तक है, जिसे अब पिछले वर्ष के निर्यात टर्नओवर के FOB वैल्यू के 3% तक किया जाएगा। वित्त मंत्री का मानना है कि इससे समुद्री खाद्य उद्योग को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और निर्यातक लागत में राहत महसूस करेंगे।
शू अपर के निर्यात पर ड्यूटी फ्री इनपुट सुविधा
इसके अलावा, लेदर और सिंथेटिक फुटवियर निर्यातकों के लिए भी बड़ी सुविधा दी गई है। बजट में प्रस्ताव रखा गया कि जूते के अपर (शू अपर) के निर्यात पर भी ड्यूटी-फ्री इनपुट आयात की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इससे फुटवियर निर्यातकों को उत्पादन लागत में कमी आएगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि कुछ लेदर प्रोडक्ट्स के इंपोर्ट पर भी ड्यूटी समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
सरकार उद्योगों को आसान और पारदर्शी बनाने पर दे रही जोर- निर्मला सीतारमण
इसका उद्देश्य उद्योगपतियों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाना और निर्यात को प्रोत्साहित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये कदम न केवल उद्योगों के लिए राहत देंगे, बल्कि देश के निर्यात को नई दिशा और गति देंगे। निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि सरकार निर्यातकों और उद्योगों के लिए नियमों को आसान और पारदर्शी बनाने पर जोर दे रही है। इस पहल से भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और देश की एक्सपोर्ट इकॉनमी मजबूत होगी।