KNEWS DESK- दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव की ए-1 ब्लॉक की गली आज खामोश है। यही गली थी, जहां कुछ दिन पहले तक नए घर में बसने की खुशी थी, रिश्तेदारों के आने-जाने की बातें थीं और गृह प्रवेश और शादी की तैयारियां चल रही थीं। अब उसी गली में मातम का सन्नाटा पसरा है।
यह घर है महाराष्ट्र के बारामती विमान हादसे में जान गंवाने वाली को-पायलट शांभवी पाठक का, जिसकी असमय मौत ने पूरे परिवार और पड़ोसियों को झकझोर कर रख दिया है। शांभवी का परिवार हाल ही में इस गली में शिफ्ट हुआ था और गृह प्रवेश की तारीख तय होने वाली थी। नियति ने सब कुछ बदल दिया और एक ही पल में खुशियों की जगह गहरी शोक छा गया।
पड़ोसियों ने बताया कि शांभवी बेहद शांत और विनम्र स्वभाव की थीं। सफदरजंग एन्क्लेव में तैनात गार्ड जितेंद्र कहते हैं कि शांभवी अपने परिवार के बेहद करीब थीं और नए घर में बसने को लेकर बहुत खुश थीं।
शांभवी की शादी मार्च में होने वाली थी। उनके माता-पिता अपनी बेटी को दुल्हन के रूप में देखने का सपना संजो रहे थे। लेकिन अब डोली उठाने की बजाय उन्हें शांभवी की अर्थी उठानी पड़ी।
बृहस्पतिवार को शांभवी की अंतिम विदाई में शामिल लोगों के आंसू नहीं रुक रहे थे। 25 साल की शांभवी पाठक वीएसआर वेंचर्स के लियरजेट-45 विमान में फर्स्ट ऑफिसर (पायलट) थीं। उनकी मां वायुसेना के बाल भारती स्कूल में शिक्षिका हैं और उनके पिता वायुसेना से सेवानिवृत्त पायलट हैं। उनका छोटा भाई नौसेना में कार्यरत है।
पड़ोस में ब्यूटी पार्लर चलाने वाली शिल्पी कहती हैं कि शांभवी सुलझी हुई, मीठी और शांत स्वभाव की लड़की थीं। उनके परिवार का व्यवहार समाज में सभी के लिए सम्मानजनक था। शांभवी का जाना न केवल परिवार के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।