बरेलीः UGC नियमों के खिलाफ सिटी मजिस्ट्रेट ने आवास के बाहर किया प्रदर्शन, पद से दिया इस्तीफा

डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के बरेली से एक चौंकाने वाली और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचाने वाली खबर सामने आई है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट और पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार के नए UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) नियमों के विरोध में अपने ही सरकारी आवास के बाहर प्रदर्शन कर दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने इन नियमों से नाराज होकर अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान भी कर दिया, जिससे पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

हाथों में पोस्टर लिए नजर आये सिटी मजिस्ट्रेट

सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री हाथों में पोस्टर लेकर आवास के बाहर खड़े नजर आए। पोस्टरों पर साफ शब्दों में लिखा था। “UGC_ROLLBACK, काला कानून वापस लो”… इसके साथ ही पोस्टरों पर #Boycott_BJP समेत कई राजनीतिक हैशटैग भी लिखे गए थे, जिसने इस पूरे विरोध को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। प्रदर्शन के दौरान अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि UGC के हालिया नियम शिक्षा व्यवस्था की मूल भावना के खिलाफ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये नियम छात्रों के भविष्य को प्रभावित करने वाले हैं और शिक्षा को एक सीमित ढांचे में बांधने का प्रयास है। उनका कहना था कि यह फैसला केवल छात्र समाज ही नहीं, बल्कि संत समाज और देश की वैचारिक परंपराओं का भी अपमान है।

सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की

उन्होंने सरकार से मांग की कि इन नियमों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि यदि सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं करती है, तो वह ऐसे पद पर बने रहना नैतिक रूप से उचित नहीं समझते। इसी भावना के तहत उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया। एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी द्वारा खुलेआम इस तरह का विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक नारे लिखे पोस्टर लेकर सामने आना प्रशासनिक दृष्टि से बेहद असामान्य माना जा रहा है। इस घटना के बाद जिले के प्रशासनिक अधिकारियों और शासन स्तर पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कई अधिकारी इसे अभूतपूर्व और साहसिक कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे प्रशासनिक मर्यादा और सेवा नियमों से जुड़ा गंभीर मामला मान रहे हैं।

सिटी मजिस्ट्रेट के प्रदर्शन से सत्ता के गलियारे में हलचल

इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दल इसे सरकार की शिक्षा नीति के खिलाफ उठी एक मजबूत आवाज बता रहे हैं, वहीं सत्तारूढ़ दल के समर्थक इसे एक अधिकारी द्वारा राजनीतिक सक्रियता अपनाने का मामला करार दे रहे हैं। फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, शासन स्तर पर पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब की जा सकती है। बरेली में हुआ यह विरोध न केवल प्रशासनिक इतिहास में एक दुर्लभ घटना बन गया है, बल्कि UGC नियमों को लेकर देशभर में चल रही बहस को भी नई दिशा दे सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *