डिजिटल डेस्क- लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर गहरी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण की कीमत आज देश का हर आम नागरिक चुका रहा है। इसका सीधा असर न केवल लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो रही है। राहुल गांधी ने कहा कि करोड़ों भारतीय रोज़ इस जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं, जो एक गंभीर राष्ट्रीय संकट का संकेत है। राहुल गांधी ने विशेष तौर पर बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि कमजोर इम्युनिटी वाले लोग, खासकर बच्चे और वरिष्ठ नागरिक, प्रदूषण की मार सबसे ज्यादा झेल रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने निर्माण श्रमिकों और दिहाड़ी मजदूरों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदूषण उनकी आजीविका पर भी सीधा असर डाल रहा है। खुले में काम करने वाले मजदूरों के लिए यह संकट दोहरी मार जैसा है स्वास्थ्य भी बिगड़ रहा है और काम के मौके भी कम हो रहे हैं।
ये संकट सिर्फ मौसम तक ही सीमित नहीं- राहुल गांधी
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह संकट सिर्फ एक मौसम तक सीमित नहीं है और इसे अगली सर्दी तक भुलाया नहीं जा सकता। राहुल गांधी ने लोगों से अपनी आवाज बुलंद करने की अपील करते हुए कहा कि बदलाव की दिशा में पहला कदम अपनी बात रखना है। “आपकी आवाज मायने रखती है और इसे बुलंद करना मेरा कर्तव्य है,” कहते हुए उन्होंने एक लिंक साझा किया, जहां लोग यह बता सकते हैं कि वायु प्रदूषण ने उन्हें या उनके परिजनों को किस तरह प्रभावित किया है। इस बीच, करीब 100 दिनों के बाद दिल्ली की आबोहवा में कुछ सुधार देखने को मिला है। शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में हुई जोरदार बारिश के बाद प्रदूषण स्तर में गिरावट दर्ज की गई।
शनिवार को दर्ज किया गया 242-256 एक्यूआई
शनिवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 242 से 256 के बीच रहा, जबकि दोपहर बाद यह घटकर करीब 190 तक पहुंच गया। रविवार दोपहर को aqi.in के मुताबिक दिल्ली का AQI 155 दर्ज किया गया, जिसे ‘मध्यम’ श्रेणी में माना जाता है। ऊर्जा और स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (CREA) की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले दिल्ली में 13 अक्टूबर 2025 को हवा की गुणवत्ता थोड़ी बेहतर थी, जब AQI 189 दर्ज किया गया था। 14 अक्टूबर के बाद से राजधानी में प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश से मिली यह राहत अस्थायी है और स्थायी समाधान के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाने की जरूरत है।