डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी कांग्रेस को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के पश्चिमी क्षेत्र के प्रांतीय अध्यक्ष और पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले ने प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है, खासकर ऐसे समय में जब कांग्रेस यूपी में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, यूपी प्रभारी अविनाश पांडेय और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को भेजा है। जानकारी के मुताबिक, शनिवार 24 जनवरी को उन्होंने अपने दर्जनों समर्थकों के साथ कांग्रेस से नाता तोड़ लिया। उनके साथ कुल 72 नेताओं ने पार्टी छोड़ी है, जिनमें करीब दो दर्जन पूर्व विधायक भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसे कांग्रेस के लिए संगठनात्मक स्तर पर एक बड़ा नुकसान माना जा रहा है।
बसपा सरकार में कद्दावर नेता के रूप में जाने जाते थे सिद्दकी
कभी बसपा सुप्रीमो मायावती के करीबी माने जाने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस नेतृत्व को सौंपे अपने इस्तीफे में पार्टी की कार्यशैली को लेकर असहजता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि काफी समय से वे संगठन के भीतर की परिस्थितियों और कामकाज के तरीके से संतुष्ट नहीं थे। सूत्रों के अनुसार, पार्टी में उनकी भूमिका और सुझावों को अपेक्षित महत्व नहीं मिलने से वे नाराज चल रहे थे, हालांकि उन्होंने किसी भी नेता या पदाधिकारी पर सार्वजनिक रूप से सीधा आरोप लगाने से परहेज किया है। इस्तीफे के कारणों को स्पष्ट करते हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि वे कांग्रेस में जातिवाद, संप्रदायवाद और सामाजिक अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने के उद्देश्य से शामिल हुए थे। लेकिन पार्टी के भीतर रहकर वे उस लड़ाई को प्रभावी ढंग से नहीं लड़ पा रहे थे। इसी वजह से उन्होंने यह व्यक्तिगत लेकिन कठिन फैसला लिया।
कांग्रेस पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से की इतिश्री
अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि वे कांग्रेस पार्टी और उससे जुड़ी सभी जिम्मेदारियों से स्वयं को मुक्त कर रहे हैं और उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाए। उन्होंने यह भी साफ किया कि कांग्रेस के किसी भी पदाधिकारी से उन्हें व्यक्तिगत शिकायत नहीं है। उनका कहना है कि मुद्दा व्यक्तियों का नहीं, बल्कि उस उद्देश्य का है जिसके लिए वे राजनीति में सक्रिय हैं। नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि उनके साथ इस्तीफा देने वाले सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं से विचार-विमर्श किया जा रहा है। आगे की रणनीति सामूहिक सहमति से तय की जाएगी और जिस राजनीतिक दल या मंच पर जनता की आवाज मजबूती से उठाई जा सकेगी, उसी के साथ आगे बढ़ने का फैसला लिया जाएगा।