माघ मेले में शंकराचार्य के स्नान विवाद ने पकड़ा सियासी रंग, कांग्रेस ने लगाए शंकराचार्य के समर्थन में पोस्टर

डिजिटल डेस्क- प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के स्नान को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासन और शंकराचार्य के बीच शुरू हुई तनातनी अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुकी है। सरकार और शंकराचार्य के बीच लगातार बयानबाजी के बीच अब राजनीतिक दल भी खुलकर मैदान में उतर आए हैं, जिससे प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विवाद के बीच अब पोस्टर वॉर भी तेज हो गया है। भारतीय युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष और अयोध्या विधानसभा से जुड़े नेता शरद शुक्ला ने लखनऊ स्थित कांग्रेस मुख्यालय पर एक विवादित पोस्टर लगाया है। इस पोस्टर में प्रयागराज कुंभ क्षेत्र की एक कथित तस्वीर लगाई गई है, जिसमें छोटे ब्राह्मणों की शिखा खींचे जाने का दावा किया गया है। पोस्टर में धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाते हुए सरकार पर सीधा निशाना साधा गया है। पोस्टर में श्रीरामचरितमानस की चौपाई “जाको प्रभु दारुण दुख देही, ताकी मति पहले हर लेही” का उल्लेख करते हुए पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े किए गए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि माघ मेले जैसे पवित्र आयोजन में संतों और उनके अनुयायियों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि धार्मिक आस्थाओं का अपमान भी है।

क्या है पूरा विवाद

दरअसल, प्रयागराज में इस समय माघ मेले का आयोजन चल रहा है। मौनी अमावस्या के दिन जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के गंगा स्नान को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। प्रशासन ने शंकराचार्य को पालकी में बैठकर स्नान करने से रोक दिया। अधिकारियों का कहना था कि किसी को भी पालकी के माध्यम से स्नान की अनुमति नहीं दी गई है और सभी श्रद्धालुओं को पैदल ही स्नान करना होगा। इसी बात को लेकर प्रशासन और शंकराचार्य के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। आरोप है कि विरोध के दौरान शंकराचार्य के शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई। इस घटना से आहत होकर शंकराचार्य माघ मेला क्षेत्र में धरने पर बैठ गए। तभी से यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।

सपा और कांग्रेस खुलकर समर्थन में उतरीं

धरना शुरू होने के बाद प्रशासन की ओर से शंकराचार्य के पद और अधिकार को लेकर दिए गए कुछ बयानों ने आग में घी डालने का काम किया। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री की ओर से भी इस मुद्दे पर बयान सामने आए, जिससे विवाद और गहरा गया। जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले छह दिनों से माघ मेले में धरने पर बैठे हुए हैं। इस बीच समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने खुलकर उनके समर्थन में मोर्चा संभाल लिया है। दोनों दलों का कहना है कि संत समाज का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सरकार को इस पूरे मामले में अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए।

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