डिजिटल डेस्क- कानपुर के बहुचर्चित कुशाग्र हत्याकांड में गुरुवार को अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अपर जिला जज-11 सुभाष सिंह की अदालत ने कुशाग्र की पूर्व ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, उसके प्रेमी प्रभात शुक्ला और साथी शिवा गुप्ता को आखिरी सांस तक जेल में रखने का आदेश दिया है। इसके साथ ही तीनों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने इस फैसले को कानून के विद्यार्थियों के लिए नजीर बताया। करीब 26 महीने पहले फिरौती के लालच में रची गई इस साजिश ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था। आचार्य नगर निवासी कपड़ा कारोबारी मनीष कनोडिया के बेटे कुशाग्र जैपुरिया स्कूल में हाईस्कूल के छात्र थे। 30 अक्टूबर 2023 को वह कोचिंग के लिए घर से निकले, लेकिन वापस नहीं लौटे। शाम को स्कूटर से एक युवक उनके घर पत्र देकर गया, जिसमें 30 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। जांच को भटकाने के लिए पत्र में ‘अल्लाह हू अकबर’ तक लिखा गया था।
31 अक्टूबर 2023 को कोठरी में शव हुआ था बरामद
पुलिस जांच में यह स्कूटर फजलगंज के खोयामंडी निवासी रचिता वत्स का निकला। रचिता ने पूछताछ में बताया कि स्कूटर उसका प्रेमी प्रभात शुक्ला ले गया था। 31 अक्टूबर को पुलिस जब प्रभात के दर्शनपुरवा स्थित घर पहुंची तो एक कोठरी से कुशाग्र का शव बरामद हुआ। पूछताछ में सामने आया कि प्रभात के साथी शिवा गुप्ता ने भी वारदात में सहयोग किया था। तीनों को उसी समय जेल भेज दिया गया था। जांच में खुलासा हुआ कि रचिता और प्रभात शादी करना चाहते थे और फिरौती की रकम से अपना नया जीवन शुरू करने की योजना थी। कुशाग्र उन्हें पहचानता था, इसलिए अपहरण के बाद उसे कोठरी में ले जाकर गला घोंटकर हत्या कर दी गई। मामले में कुशाग्र के चाचा संजय कनोडिया ने रायपुरवा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
अभियोजन की तरफ से 14 गवाह हुए थे पेश
इस केस की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से 14 गवाह पेश किए गए, जिनमें घर के तीन गवाह भी शामिल थे। 13 जनवरी को अंतिम बहस पूरी हुई और मंगलवार को अदालत ने तीनों को दोषी करार दिया था। गुरुवार को सजा सुनाए जाने के दौरान अदालत खचाखच भरी रही। सुरक्षा के मद्देनज़र परिसर के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल और एसएफएफ तैनात रही। सजा के बिंदुओं पर बहस के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले को जघन्य बताते हुए फांसी की मांग की, जबकि बचाव पक्ष ने कम उम्र और पहला अपराध होने का हवाला देकर नरमी की अपील की। हालांकि अदालत ने सभी तथ्यों, साक्ष्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
फैसला सुनते ही फूट-फूटकर रोने लगे दोषी
जैसे ही फैसला सुनाया गया, तीनों दोषी फूट-फूटकर रो पड़े। प्रभात शुक्ला कटघरे में सिर पकड़कर जमीन पर बैठ गया। दूसरी ओर, कुशाग्र के माता-पिता और परिजन भी बेटे की याद में बिलख उठे। जिला शासकीय अधिवक्ता दिलीप अवस्थी और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता भास्कर मिश्र ने बताया कि यह फैसला समाज के लिए कड़ा संदेश है और भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने में मील का पत्थर साबित होगा।