डिजिटल डेस्क- माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक ओर जहां शंकराचार्य मेला प्रशासन से सार्वजनिक माफी की मांग पर अड़े हुए हैं, वहीं उन्हें नोटिस जारी किए जाने के बाद मामला और ज्यादा तूल पकड़ता जा रहा है। अब इस पूरे प्रकरण में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी खुलकर शंकराचार्य के समर्थन में उतर आए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में राकेश टिकैत ने माघ मेला प्रशासन और सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “महाराज जी को घुमा दो। शंकराचार्य जी अगर बिना स्नान के लौटेंगे तो पाप चढ़ेगा और सरकार पर भारी पड़ेगा। यह तानाशाही सरकार है, यहां सवाल पूछने वालों पर मुकदमे दर्ज किए जाते हैं।” टिकैत के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
शंकराचार्य शब्द इस्तेमाल करने पर जारी किया गया है नोटिस
इससे पहले माघ मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी करते हुए 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा था। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए सवाल किया गया कि वे अपने नाम के साथ ‘शंकराचार्य’ शब्द का प्रयोग किस आधार पर कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि नियमों और अदालती आदेशों के पालन के तहत यह स्पष्टीकरण जरूरी है। हालांकि, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने प्रशासन के नोटिस पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या की है और जानबूझकर गुमराह किया जा रहा है। वकील ने कहा कि इस संबंध में प्रशासन को कानूनी नोटिस भेजा जाएगा और आगे आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
अखिल भारत हिंदू महासभा ने दुर्व्यवहार के विरोध में की बैठक
उधर, इस मामले को लेकर धार्मिक संगठनों में भी नाराजगी देखी जा रही है। मेरठ में अखिल भारत हिंदू महासभा ने शंकराचार्य के साथ कथित दुर्व्यवहार के विरोध में एक अहम बैठक की। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि मां गंगा के जल में स्नान के लिए जा रहे शंकराचार्य और उनके शिष्यों के साथ किया गया व्यवहार अत्यंत निंदनीय और अस्वीकार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि को नुकसान पहुंचाने की साजिश का हिस्सा हो सकती है।