डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ कथित तौर पर हुए दुर्व्यवहार को लेकर सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज ने इस मुद्दे पर यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे न सिर्फ एक संत का अपमान, बल्कि पूरे हिंदू समाज के लिए शर्मिंदगी करार दिया है। सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर माघ मेले की घटना से जुड़ा एक वीडियो साझा करते हुए लिखा कि शंकराचार्य सनातन धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक मार्गदर्शकों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य की भूमिका ईसाइयों में पोप जैसी होती है, जो धर्म का मार्गदर्शन करते हैं, वैदिक परंपराओं की रक्षा करते हैं और धर्मग्रंथों की व्याख्या के जरिए समाज को दिशा देते हैं। ऐसे संत के साथ सार्वजनिक रूप से धक्का-मुक्की और अपमान होना बेहद निंदनीय है।
सौरभ भारद्वाज ने दो तस्वीरें शेयर करते हुए कसा तंज
आप नेता ने अपने पोस्ट में यूपी सरकार पर तंज कसते हुए लिखा कि पिछले 10 वर्षों में हिंदू धर्म की छवि को किस तरह बदला गया है। उन्होंने लिखा, “पहले शंकराचार्य हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व करते थे, अब लोगों को पीटने वाले कांवड़िये सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व करते नजर आते हैं।” भारद्वाज ने इस बयान के साथ दो तस्वीरें भी साझा कीं और दावा किया कि सरकार की नीतियों के कारण धर्म की मूल भावना को नुकसान पहुंचा है। इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी पहले ही योगी सरकार पर हमलावर रहे हैं। संजय सिंह ने काशी में मंदिरों को तोड़े जाने का आरोप लगाते हुए सरकार की आलोचना की थी, जिसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर के बावजूद संजय सिंह ने दोबारा सरकार पर हमला करते हुए कहा कि वे डरने वाले नहीं हैं और अपनी बात मजबूती से रखते रहेंगे।
कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा, की कड़ी आलोचना
वहीं, उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी माघ मेले में शंकराचार्य के साथ हुई घटना को लेकर प्रदेश सरकार से माफी की मांग की है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य के काफिले को रोका जाना और उनके साथ हुआ व्यवहार पूरी तरह निंदनीय है। अजय राय ने मांग की कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि अगर सरकार वास्तव में धर्म और संतों का सम्मान करती है, तो उसे इस मामले में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश सरकार भी इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है और जल्द ही इसकी जांच बैठाई जा सकती है। प्रशासन की ओर से स्थिति को संभालने और विवाद को शांत करने की कोशिशें जारी हैं।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यह पूरा मामला मौनी अमावस्या के दिन का है, जब प्रयागराज में संगम की रेती पर लाखों श्रद्धालु स्नान कर रहे थे। इसी दौरान ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच किसी बात को लेकर टकराव हो गया। यह विवाद करीब तीन घंटे तक चला, जिसमें बहस, धक्का-मुक्की और मान-मनौव्वल के कई दौर चले। इस दौरान मौजूद श्रद्धालु भी हैरान रह गए। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और धार्मिक बहस का केंद्र बन गया है।