बीएमसी में हार के बाद भी ठाकरे ब्रदर्स की साख बरकरार, Axis My India के एमडी प्रदीप गुप्ता ने बताई वजह

KNEWS DESK – महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव की मतगणना के बीच बीएमसी के नतीजों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है. शुरुआती रुझानों में बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) का गठबंधन स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ता दिख रहा है. 227 सीटों वाली बीएमसी में महायुति 115 सीटों पर आगे है, जबकि ठाकरे बंधुओं और एनसीपी-एसपी का गठबंधन 82 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. इन नतीजों से पहली बार बीएमसी की सत्ता बीजेपी के हाथों में जाती नजर आ रही है, जिससे ठाकरे ब्रांड को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

इसी मुद्दे पर Axis My India के एमडी प्रदीप गुप्ता ने ठाकरे बंधुओं के राजनीतिक भविष्य पर अहम टिप्पणी की है. उनसे सवाल किया गया कि क्या शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के साथ आने से मराठी बहुल इलाकों में ठाकरे भाइयों ने अपनी साख बचा ली है. इस पर प्रदीप गुप्ता ने कहा कि हार के बावजूद ठाकरे बंधुओं के वजूद पर सवाल नहीं उठाए जा सकते.

प्रदीप गुप्ता के मुताबिक, मराठी बहुल इलाकों, खासकर ग्रेटर मुंबई में ठाकरे बंधु अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल रहे हैं. उन्होंने कहा कि पिछले बीएमसी चुनाव में शिवसेना को 84 सीटें मिली थीं. इस बार शिंदे गुट अलग हो गया, लेकिन मनसे के जुड़ने से संतुलन बना. अगर उद्धव ठाकरे गुट और मनसे मिलकर करीब 72 सीटें जीत रहे हैं, तो यह उनके लिए बुरा संकेत नहीं है. हार जरूर हुई है, लेकिन इतनी बड़ी नहीं कि उनके राजनीतिक अस्तित्व पर सवाल खड़े किए जाएं.

वहीं, रुझानों की बात करें तो बीएमसी में बीजेपी 88 सीटों पर आगे है, शिवसेना (शिंदे) 27, शिवसेना (यूबीटी) 72, कांग्रेस 15, मनसे 8, एनसीपी 4, एनसीपी-एसपी 2, वीबीए 1 और अन्य उम्मीदवार 9 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं. राज्य के 29 नगर निगमों में से 23 में बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन आगे चल रहा है.

मुंबई के अलावा पुणे, नागपुर और नासिक जैसे बड़े शहरों में भी महायुति को स्पष्ट बढ़त मिली है. खास बात यह है कि मुंबई में बीजेपी 45 साल में पहली बार बीएमसी की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. इसके साथ ही पार्टी पहली बार मुंबई में अपना मेयर बनाने की स्थिति में पहुंच गई है, जो उसके लिए ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है.

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