डिजिटल डेस्क- महाराष्ट्र में निकाय चुनावों के नतीजे सामने आने लगे हैं और शुरुआती रुझानों ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। इसी बीच कल्याण–डोंबिवली महानगरपालिका से एक बेहद दिलचस्प और अनोखा परिणाम सामने आया है, जहां एक ही परिवार के तीन उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। खास बात यह है कि ये तीनों उम्मीदवार अलग-अलग राजनीतिक दलों से चुनाव मैदान में थे, बावजूद इसके जनता ने तीनों पर भरोसा जताया। कल्याण–डोंबिवली महानगरपालिका में कुल 122 सीटें हैं। मतगणना शुरू होते ही प्रभाग क्रमांक-21 से जुड़े तीनों वार्डों के नतीजों ने सभी का ध्यान खींच लिया। प्रभाग नंबर-21 (क) से शिवसेना की उम्मीदवार रेखा जनार्दन म्हात्रे ने जीत हासिल की। वहीं, वार्ड नंबर-21 (ब) से बीजेपी की उम्मीदवार और पेशे से डॉक्टर रविना राहुल म्हात्रे विजयी रहीं। इसके अलावा प्रभाग क्रमांक-21 (अ) से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के उम्मीदवार प्रह्लाद म्हात्रे ने भी चुनाव जीत लिया। बताया जा रहा है कि रेखा म्हात्रे, रविना म्हात्रे और प्रह्लाद म्हात्रे आपस में करीबी रिश्तेदार हैं और एक ही परिवार से ताल्लुक रखते हैं।
परिवार में खुशी का माहौल
तीनों की जीत के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। स्थानीय स्तर पर इस परिणाम को मतदाताओं द्वारा व्यक्ति और काम को प्राथमिकता देने के तौर पर देखा जा रहा है, न कि केवल पार्टी के आधार पर वोट देने के रूप में। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह नतीजा स्थानीय राजनीति में परिवार की पकड़ और क्षेत्र में उनकी सामाजिक स्वीकार्यता को दर्शाता है। उधर, महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों से मिले नतीजों और रुझानों ने भी कई बड़े संकेत दिए हैं। राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव परिणाम धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। इस चुनाव में जहां कई दिग्गज नेताओं के परिजनों को हार का सामना करना पड़ा है, वहीं कुछ अप्रत्याशित जीत ने राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है। एनसीपी के कद्दावर नेता नवाब मलिक के भाई कप्तान मलिक को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार ने शिकस्त दी है, जिसे एनसीपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
30 साल बाद सत्ता में वापसी करती दिख रही है भाजपा
सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर मुंबई महानगरपालिका से जुड़ा है। शुरुआती रुझानों के अनुसार करीब 30 साल बाद बीजेपी यहां सत्ता में वापसी करती नजर आ रही है। मुंबई महानगरपालिका न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि पूरे एशिया की सबसे अमीर नगर निगम मानी जाती है, ऐसे में यहां बीजेपी की बढ़त को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। इसके अलावा पुणे, नागपुर और ठाणे जैसे बड़े शहरों में भी बीजेपी और उसके सहयोगी दल बहुमत की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। कुल मिलाकर 29 में से 27 नगरपालिकाओं में बीजेपी गठबंधन को बढ़त मिली है, जबकि केवल दो जगहों पर कांग्रेस ने अपनी पकड़ बनाई है।